कामिका एकादशी का व्रत बुधवार को रखा जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी बुधवार को कामिका एकादशी के रूप में मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार कामिका एकादशी भगवान विष्णु की पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है। इस व्रत के पुण्य से जीवात्मा को पापों से मुक्ति मिलती है। यह एकादशी कष्टों का निवारण करने वाली और मनोवांछित फल देने वाली है।
राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी पंडित पंडित उमेश चंद नौटियाल ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि मंगलवार शाम 4: 44 बजे शुरू होगी। बुधवार दोपहर 3:55 बजे तक एकादशी तिथि रहेगी। कहा कि पंचांग को देखते हुए कामिका एकादशी का व्रत बुधवार को ही रखा जाएगा। बताया कि सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस शुभ दिन पर व्रत रखने के साथ पूर्ण समर्पण के साथ भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। कहा कि ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा भी अवश्य करनी चाहिए। इस एकादशी की कथा श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। इससे पहले राजा दिलीप को वशिष्ठ मुनि ने सुनायी थी। इसे सुनकर उन्हें पापों से मुक्ति एवं मोक्ष प्राप्त हुआ था। एकादशी व्रत का पारण वीरवार को सुबह 5:43 बजे से लेकर सुबह 8:24 बजे के बीच होगा।
अश्वमेघ यज्ञ जितना फल देती है कामिका एकादशी
पंडित उमेश ने बताया कि कामिका एकादशी उत्तम फलों को देने वाली है। एकादशी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से अमोघ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन तीर्थ स्थलों में स्नान दान करने की प्रथा भी रही है। इस एकादशी का फल अश्वमेघ यज्ञ के समान होता है। इसके अलावा कामिका एकादशी व्रत के दिन श्री हरि का पूजन करने से व्यक्ति के पितरों के भी कष्ट दूर होते है। व्यक्ति पाप रूपी संसार से उभर कर, मोक्ष की प्राप्ति करने में समर्थ हो पाता है। उन्होंने कहा कि सावन माह में भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य को गंधर्वों और नागों की सभी की पूजा का फल मिलता है।