एक देश एक चुनाव के हक में हिमाचल भाजपा, बिंदल ने समिति को सौंपी रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश भाजपा एक देश एक चुनाव के हक में है। वीरवार को राजधानी शिमला पहुंची संयुक्त संसदीय समिति को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इस संदर्भ में अपनी रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव के कारण सरकार का रोजमर्रा का काम प्रभावित होता है। भारत का संविधान बनने से लेकर 1970 के दशक तक देश में एक साथ चुनाव होते थे। भाजपा ने टीमों का गठन कर पूरे प्रदेश का दौरा कर समर्थन में 1287 प्रस्ताव प्राप्त किए हैं। राजधानी शिमला के अध्ययन दौरे पर आई संयुक्त संसदीय समिति ने एक देश एक चुनाव काे लेकर विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। समिति अध्यक्ष पीपी चौधरी की अगुवाई में आए दल में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर, राज्यसभा सांसद पी विल्सन, भुवनेश्वर, राहुल सिंह, जीशा जेम्स मौजूद रहे। इस दौरान भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल बिंदल की अध्यक्षता में समिति से मिला। पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, विधायक जीत राम कटवाल, मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा एवं जिला अध्यक्ष केशव चौहान भी इस दौरान मौजूद रहे।
भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने समिति को एक देश एक चुनाव पर एक रिपोर्ट दी और बताया कि प्रदेश में 1287 प्रस्ताव इस चुनावी प्रक्रिया के पक्ष में रहे हैं। बिंदल ने कहा कि हमारा स्पष्ट मत है कि जब भारत का संविधान बना, तब से लेकर 1970 के दशक तक संसदीय चुनाव, विधानसभाओं के चुनाव, स्थानीय शहरी निकाय के चुनाव, पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव एक साथ हुआ करते थे। बदलते वक्त के साथ जब 1975 में देश में आपातकाल लगा तो चुनावों का समय बदल गया। इसके साथ ही जो चुनी हुईं सरकारें थीं, उनको तोड़ने का क्रम शुरू हुआ। इस कारण आजकल आए दिन चुनाव होते हैं। एक साल में दो-तीन राज्यों के अलग-अलग समय में चुनाव होते हैं। डाॅ. बिंदल ने कहा कि यदि लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय शहरी निकायों एवं पंचायतीराज के चुनाव एक समय के अंदर पूरे देश में हों तो पैसे की बड़ी बचत होगी। चुनावों में जो लाखों-करोड़ों लोग काम में लगते हैं, उनकी श्रम शक्ति की भी बचत होगी। चुनाव आचार संहिता के लगते ही लंबे समय के लिए विकास कार्य रुक जाते हैं। इसलिए जिस तेज गति के साथ भारत आगे बढ़ रहा है, उस बढ़ते हुए भारत की गति को और तीव्र करने के लिए वन नेशन वन इलेक्शन के संशोधन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।