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हिमाचल के बागवानों की चांदी, जेरोमाइन सेब के रेट ने तोड़ा रिकॉर्ड

Wed, 09 Aug 2017 12:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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जेरोमाइन किस्म के सेब ने इस सीजन में बिकने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इटली से मंगवाए गए एम 9 रूट स्टॉक पर तैयार इस सेब की दो लेयर का एक छोटा बाक्स 1500 रुपये तक बेचा गया। अगर इसका हिसाब 28 किलो के बक्से से लगाया जाए तो इतना सेब 3750 रुपये में बिका है।
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आम तौर पर बागवान 28 किलो के बड़े बक्से में ही सेब बेचते हैं। मंगलवार को शिमला जिले के एक बागवान मोतीलाल चौहान ने ठियोग की स्थानीय मंडी में ही दिल्ली से आए एक आढ़ती के माध्यम से इस सेब की 310 पेटियां बेचीं।

ये 1500 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से बिकीं। माना जा रहा है कि इतनी ऊंची कीमत पर सेब इस सीजन में नहीं बिका है। इससे एक बात साफ हो गई है कि निचले क्षेत्रों के बागवानों के लिए जेरोमाइन किस्म सचमुच वरदान बनकर आ गई है।
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साल भर बगीचे में करते हैं परवरिश 
बागवान मोतीलाल चौहान बताते हैं कि वे अन्य कई बागवानों की तरह मालरोड शिमला में घूमकर बागवानी नहीं करते। वे साल भर सेब के बगीचों में पौधों की परवरिश करते हैं। समय पर खाद, पानी, उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों को डालते हैं।

एमएम 109 रूट स्टॉक जिसे एम 9 भी कहते हैं, उस पर जेरोमाइन किस्म की उन्होंने ये 310 पेटियां उगाईं। अच्छा परिणाम लेने के लिए थोड़ी सिंचाई भी जरूरी है। लार्ज, मीडियम, स्माल, एक्स्ट्रा स्माल सेब की ठीक से ग्रेडिंग की, उसी के बाद मार्केट में सेब लाया।

इस रूट स्टॉक पर उगाया गया सेब गुणवत्ता में बहुत ही बेहतरीन होता है। एक सा आकार, एक बराबर लाल रंग और इस सेब के स्वादिष्ट होने के साथ-साथ इसकी शेल्फ लाइफ लंबी होती है। तभी इसकी मांग है। विदेशों से आयातित सेब से धीमी पड़ने वाली सेब मार्केट को यही टक्कर दे सकता है।    

बागवानी इस किस्म को लगाएं और मुनाफा कमाएं : प्रधान सचिव 
प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा का कहना है कि जेरोमाइन किस्म ही ऐसी है कि इसके दो लेयर का बॉक्स 1500 रुपये में अगर बिक रहा है तो इसमें कोई अचरज नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सेब की खासियत यह है कि ये लंबोतरा होता है।

इसमें प्राकृतिक लाल रंग होता है। ये निचली बेल्ट में भी होती है। ये अर्ली वैराइटी है। यानी, जब मार्केट में सेब नहीं होता तो ये पहुंच जाता है। सरकार ने हाल ही में इसी सेब को विदेशों से आयात किया है। इसी किस्म पर कुछ लोग विवाद खड़ा कर रहे हैं, जबकि ये हिमाचल के बागवानों की आर्थिकी को बदल सकता है। बागवान इस किस्म को लगाएं और मुनाफा कमाएं। 
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