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शिमला में पीलिया से हड़कंप, ऐसे करें बचाव

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तारादेवी और आसपास के इलाकों के बाद अब शिमला शहर भर से अस्पतालों में पीलिया के मामले आने शुरू हो गए हैं। मामले बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। पीलिया झड़वाने के लिए लोग झाड़फूंक करने वालों का भी सहारा ले रहे हैं।
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बीते एक सप्ताह से अभी तक आईजीएमसी अस्पताल में पीलिया के 13 मामले सामने आए है। जबकि दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में आठ मामले आए हैं। बैम्लोई में झाड़फूंक से पीलिया का इलाज करने का दावा करने वाले जगतराम के पास इन दिनों मरीजों का तांता लग रहा है।

शहर के हर कोने से लोग पीलिया झड़वाने यहां पहुंच रहे हैं। जगत राम का कहना है कि दिन में करीब 100 से 150 लोग पीलिया झड़वाने उनके पास आ रहे हैं। बीते करीब एक हफ्ते से पीलिया झड़वाने के लिए आने वालों का आंकड़ा बढ़ गया है। रविवार को भी बैम्लोई में जगत राम के घर के बाहर पीलिया झड़वाने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं।
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झाड़फूंक के लिए पहुंच रहे लोग

विकासनगर से पीलिया झड़वाने आए कृष्ण लाल शर्मा (38) ने बताया कि दवाइयों से जब असर नहीं पड़ा तो झाड़फूंक करवाने के लिए आना पड़ा। उनका कहना है कि बिना झाड़ फूंक पीलिया का इलाज संभव नहीं है।

पंथाघाटी के सीताराम (26) ने बताया कि दो दिन से वह पीलिया झड़वाने आ रहे हैं। सब्जी मंडी के नरेंद्र (31) ने बताया कि डॉक्टर के बताए परहेज के साथ-साथ झाड़फूंक भी करवा रहे हैं। कैथू के हरिकृष्ण (48), तरुण कुमार (17), मालरोड के मेहर सिंह (32), घोड़ा चौकी के जोगेंद्र (31) भी रविवार को पीलिया झड़वाने बैम्लोई पहुंचे।

हर हफ्ते पानी के सैंपल लेगा महकमा

तारादेवी सहित राजधानी शिमला के पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग अब हर सप्ताह पानी के सैंपल भरेगा। शहर में पीलिया के बढ़ते मामलों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग यह व्यवस्था करने जा रहा है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग लोगों को दूषित पानी का प्रयोग न करने को लेकर भी जागरूक करेगा।

शहर में पीलिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में नियमित तौर पर पानी की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था करने जा रहा है। विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों से हर सप्ताह पानी के सैंपल भरेंगी। इन सैंपलों की जांच के बाद पानी की गुणवत्ता परखी जाएगी और सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर लोगों को पानी के इस्तेमाल को लेकर सलाह दी जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने 11 फरवरी को तारादेवी क्षेत्र से पानी के चार सैंपल लिए थे। इसमें से एक सैंपल फेल हो गया और एक अन्य सैंपल संदेहास्पद पाया गया। हालांकि चार में से दो सैंपल संतोषजनक पाए गए थे। विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को दूषित पानी का प्रयोग न करने और पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

ऐसे होता है पीलिया

यह रोग ज्यादातर ऐसे स्थानों पर होता हैं, जहां के लोग व्यक्तिगत और सफाई पर कम ध्यान देते हैं या बिल्कुल ही ध्यान नहीं देते। वायरल हैपेटाइटिस बी किसी भी मौसम में हो सकता है। वायरल हैपटाइटिस ए व नॉन बी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्तिके नजदीकी संपर्क से होता है। ये वायरस रोगी के मल में होते हैं।

ऐसे होती है रोगी की पहचान
-रोगी को बुखार रहना, भूख न लगना, चिकनाई वाले भोजन से अरुचि।
-जी मिचलाना और कभी कभी उल्टियां होना। सिर में दर्द होना।
-सिर के दाहिने भाग में दर्द रहना। आंख व नाखून का रंग पीला होना।
-पेशाब पीला आना। अत्याधिक कमजोरी और थका थका सा लगना
-रोगी को शीघ्र ही डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लेना चाहिए।
-बिस्तर पर आराम करना चाहिए। घूमना फिरना नहीं चाहिए।
-लगातार स्वास्थ्य जांच करवाते रहना चाहिए।
-नीबू संतरे और अन्य फलों का रस भी इस रोग में गुणकारी होता है।
-वसा युक्त गरिष्ठ भोजन का सेवन इसमें हानिकारक है।
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इनका भी करें सेवन

चावल, दलिया, खिचडी, उबले आलू, शकरकंद, ग्लूकोज, गुड़, चीकू, पपीता, छाछ, मूली का सेवन करना चाहिये।
ऐसे करें रोकथाम एवं बचाव
-खाना बनाने परोसने खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।
-भोजन जालीदार अलमारी या ढक्कन से ढककर रखना चाहिए, मक्खियों व धूल से बचाया जा सके । ताजा व शुद्ध गर्म भोजन करें। दूध व पानी उबालकर पीएं। गंदे सड़े गले व कटे हुए फल नहीं खाएं।

पीलिया से बचाव को इलाज जरूरी
झाड़फूंक के भरोसे न रहें। डाक्टरी इलाज करवाना बेहद जरूरी है। इलाज के साथ मरीजों को खानपान में भी परहेज रखना चाहिए। तय समय के बाद पीलिया का प्रभाव स्वयं कम हो जाता है। -पीएल गौंटा, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल
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