शर्मनाक पहलू यह है कि अभी इन पदों के लिए लिखित परीक्षा तक नहीं की गई है, लेकिन सरकार ने चोर दरवाजे से अपने चहेते सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इन्हीं पदों पर पुनर्नियुक्ति देने का सिलसिला तेज कर दिया है। यदि सरकार को केवल अपने ही खास लोगों और रिटायर्ड मित्रों को मलाई बांटनी है, तो फिर परीक्षाओं का यह ढोंग क्यों रचा जा रहा है। मुख्यमंत्री शगुन योजना जिसका उद्देश्य बीपीएल परिवारों की बेटियों की शादी में संबल प्रदान करना था, आज सरकार की उपेक्षा और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गई है। सिरमौर जिले का यह ताजा उदाहरण शर्मनाक है, जहां 193 लाभार्थियों के लगभग 60 लाख ट्रेजरी में रोक दिए गए हैं। महिलाओं को हर महीने 1500 देने की झूठी गारंटी दी और बिना एक पैसा दिए भी देश भर में घूम घूम कर महिलाओं को पैसा देने का झूठ बोल रहे हैं। लेकिन पहले से प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदेश की बेटियों से कोई शुल्क न लेने की जो प्रथा हमने चलाई थी वह भी सरकार ने बंद कर दी है।