अप्रैल में एक मंत्री ने आग्रह किया कि सादी वर्दी नहीं वर्दी वाला पीएसओ चाहिए। उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम में जाना होता है। अधिकांश पीएसओ वर्दी नहीं पहनते। मंत्री के आग्रह पर करीब 60 से ज्यादा पीएसओ को उनकी पुरानी जगह भेजने का फैसला किया गया, आर्डर भी हो गए।
सीआईडी से पीएसओ बटालियन के साथ अटैच कर दिए गए। पीएसओ को अब छुट्टी, टूअर बिल क्लेम करने के लिए बटालियन जाना होगा। इतना ही नहीं, उन्हें राजधानी भत्ते से भी महरूम रहना होगा। सीआईडी की सुरक्षा शाखा से वीआईपी की सुरक्षा में पीएसओ लगाए जाते हैं।
इन्हें वर्दी पहनना अनिवार्य नहीं होता, इतना ही नहीं कोई भी मंत्री अपनी इच्छा से किसी भी पीएसओ की मांग कर सकता है। मौजूदा समय में अधिकांश पीएसओ इन नेताओं के साथ काफी लंबे अर्से से तैनात हैं। अब देखना है कि आने वाले दिनों में जयराम सरकार अपने फैसले से पलटती है या फिर बटालियन या जिला के लिए रिलीव करके ही दम लेती है।