विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया व बाल सत्र के लिए मुख्यमंत्री चुनी गईं जाह्नवी।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को होने जा रहे बाल सत्र के लिए मुख्यमंत्री के रूप में मंडी की जाह्नवी को चुना गया है। बाल सीएम की नियुक्ति के बाद जाह्नवी रविवार को अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगी। राज्य विधानसभा में मेधावी बच्चे सोमवार को मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक के रूप में नजर आएंगे। शनिवार को प्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में चयनित हुए एक बच्चे ने विधायी प्रक्रिया को जाना। प्रोटेम स्पीकर बाल विधायकों को शपथ दिलाएंगे। बाल सत्र के दौरान राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
शनिवार को प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इस बारे में प्रेस वार्ता के माध्यम से जानकारी साझा की। इस विशेष सत्र में शामिल होने वाले बाल विधायक भी शनिवार को विधानसभा भवन पहुंचे। अगले दो दिन बच्चे शिमला में रहेंगे। प्रदेश विधानसभा बाल सत्र विश्व ‘बाल श्रम निषेध दिवस’ पर आयोजित किया जा रहा है। जिन बच्चों ने अपनी बात को प्रभावशाली तरीके से रखा, उन 68 का चयन किया गया। विधानसभा में 68 सीटें हैं। फ्यूचर सोसायटी से जुड़ीं मीना शर्मा ने बताया कि पिछले 16 सालों से बच्चों, युवाओँ और महिलाओं की समान भागीदारी के छोटे-छोटे किए जा रहे हैं। इसी क्रम में राजस्थान विधानसभा में 14 नवंबर 2021 को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के तत्वाधान में विधानसभा बाल सत्र का आयोजन किया गया था, जिसके मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला थे।
हिमाचल के विधानसभा क्षेत्रों से 63 बच्चे चुने गए, बाल विधायकों में सबसे ज्यादा 40 लड़कियां
प्रदेश के 43 विधानसभा क्षेत्रों से 63 बच्चे चुने गए। 5 राज्यों से पांच बच्चों का चयन हुआ। इसमें 40 लड़कियां और 28 लड़के बाल विधायक के रूप में शामिल रहे। उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान सहित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर से एक-एक बच्चे का चयन हुआ। बच्चों ने अपने विचार दो महीने चले अभियान के दौरान वीडियो बनाकर डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट और मोबाइल नंबर पर भेजे। करीब 25 हज़ार बच्चे इस अभियान से जुड़े।
बाल विचारों को नीति निर्माण में स्थान प्रदान कराना इसका मकसद : पठानिया
स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि बाल विचारों को नीति निर्माण में स्थान प्रदान कराना इसका मकसद है। बच्चों के मुद्दों और विषयों को उनकी ओर से प्रस्तुत किए जाने से मौलिकता और नवीनता को जगह मिलती है। दुनिया के कुछ देशों में बच्चे राजनीतिक प्रतिनिधित्व हासिल कर चुके हैं। देश में भी नई पीढ़ी में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए यह सत्र विधानसभा भवन में आयोजित किया जा रहा है। देश में युवा संसद के जरिये बच्चों को सुनने का अवसर पहले भी मिलता रहा है, लेकिन विधानसभा भवन में इसका आयोजन बच्चों के विचारों को गंभीरता से लेने की प्रतिबद्धता बताता है।
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