जुन्गा (शिमला)। देवता जुन्गा के मंदिर देवठी में जागरण का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों लोगों ने देवता जुन्गा (बाल) का आशीर्वाद प्राप्त कर देव कार्य निपटाए। देवता के बजीर दौलत राम मेहता और देवता के गुर हरिनंद शर्मा ने बताया कि जागरण में मनौती पूर्ण होने पर दोष निवारण कार्यों को निपटाया जाता है। हरिनंद शर्मा ने बताया कि देव जुन्गा (बाल) 22 टीका में से एक है। देव जुन्गा प्राकृतिक आपदा और किसी प्रकार की महामारी के प्रकोप आदि से अपनी प्रजा की रक्षा करते हैं। देव जुन्गा को उनके पूर्वज नादौन से लाए थे। हरिनंद शर्मा ने बताया कि देवठी में करीब दो शताब्दी पुराना देवता जुन्गा का बाल मंदिर है। इस मंदिर में यम का ढोल आज भी विद्यमान है। मान्यता है कि ट्रहाई के एक झड़ाण परिवार के किसी पुरुष ने श्मशानघाट में चल रहे यमदूतों के पर्व से एक थाल और ढोल लाया था। यमदूतों ने उसका पीछा किया तो वह देवता की शरण में चला गया जहां देवता ने उसकी यमदूतों ने रक्षा की थी। इसके अतिरिक्त यमदूतों के थाल को कोटी में काली माता की पौल के नीचे दबा दिया था। संवाद