विश्व बैंक की वित्तीय मदद से प्रदेश में चल रहे बागवानी विकास प्रोजेक्ट की नियुक्तियों में गड़बड़झाला सामने आया है। विश्व बैंक की 1134 करोड़ रुपये की मदद से चल रहे प्रोजेक्ट में जेई सहित फील्ड स्टाफ की भर्ती से पहले पूरी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। यह गंभीर मामला प्रकाश में आने के बाद विभाग ने उद्यान निदेशक से छह बिंदुओं में जवाब तलब किया है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्यान ने इस संबंध में पत्र संख्या एचटीसी. एफ (5)-10/2014-वॉल. 9 दिनांक 26-जून- 2019 उद्यान निदेशक को पत्र भेजा गया है। इस पत्र में निदेशक से पूछा गया है कि क्या एचपीएचडीपी भर्ती का मामला वित्त विभाग से उठाया गया था और वहां से विभिन्न सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। बागवानी विकास प्रोजेक्ट की अवधि कब तक है।
इस प्रोजेक्ट के लिए कितने पदों को भरा गया है, क्या ये पद वित्त विभाग की मंजूरी के भरे गए हैं? अगर ऐसा है तो इस संबंध में दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। प्रोजेक्ट की गाइडलाइन और नियमों के अनुसार कितनी मानव शक्ति का ढांचा मंजूर किया गया। प्रस्तावित पदों के अनुसार कैसे काम कराया जा रहा है। प्रस्तावित पदों के लिए बजट प्रावधान कैसे किया किया है। इस संबंध में भी मंजूरी की प्रति संलग्न करने करके भेजने को कहा गया है।
उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक के प्रोजेक्ट के काम में गति न आने के बाद सरकार पर बराबर दबाव बनाया गया था कि प्रोजेक्ट में फील्ड स्टाफ खासकर कनिष्ठ अभियंताओं के पदों को भरा जाए। इसके बाद आनन-फानन में पदों को भरने के लिए लिखित परीक्षा करवाकर करीब पचास पदों को भरा है। बताते हैं कि नई भर्तियों के लिए पहले मंजूरी लेना जरूरी होता है और उसके बाद आयोग के माध्यम से लिखित परीक्षा के बाद पदों को भरा जा सकता है।