आरोपियों की सब डिवीजन (वेस्ट), ईस्ट, चौपाल, नारकंडा और रोहड़ू की शाखाओं में तैनाती हुई थी। इसमें हरियाणा के जिला जींद के सोनू ने कोटखाई के गम्मा, विक्रम ने कोटखाई के बखोल, राकेश ने मतियाना के केलवी, रवि कुमार ने क्यारी के गलेहा, सुशील ने नेरवा के मधाना, साहिल ने कोटखाई के गुम्मा, राकेश ने कोटखाई के नागन, अमन ने टिक्कर के डरारा, विकास ने धामी, साहिल ने मशोबरा, अंकित कुमार ने नारकंडा के शिलारू ब्रांच, राहुल ने ढली के छराबड़ा और जिला मंडी के मनीष कुमार ने शिमला डिवीजन में नौकरी हासिल की थी। इन्होंने माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज (यूपी), शिक्षा बोर्ड भिवानी (एचआर) और झारखंड अकादमिक काउंसिल शिक्षण संस्थान के फर्जी सर्टिफिकेट बनाए थे।