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अंतरराज्यीय वाहन गिरोह पर्दाफाश: सिबिल स्कोर में हेराफेरी, फर्जी बैंक खातों के सहारे चल रहा था रैकेट

Fri, 23 Jan 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

 जांच में एक ऐसे अंतरराज्यीय वाहन गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने चोरी और फर्जीवाड़े से बैंकिंग और इंश्योरेंस सिस्टम को करोड़ों की चपत लगा दी। 
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जांच(सांकेतिक) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (इंटर स्टेट सेल) की जांच में एक ऐसे अंतरराज्यीय वाहन गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसने चोरी और फर्जीवाड़े से बैंकिंग और इंश्योरेंस सिस्टम को करोड़ों की चपत लगा दी। यह गिरोह केवल गाड़ियों की चोरी या अवैध खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने फर्जी बैंक खातों, कृत्रिम तरीके से सुधारे गए सिबिल स्कोर और इंश्योरेंस क्लेम के जरिये देश के वित्तीय ढांचे में करोड़ों रुपये की सेंध लगाई है। पुलिस ने अब तक टोयोटा फॉर्च्यूनर, महिंद्रा थार और किया सेल्टोस जैसी 16 लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। अब तक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का अपराध करने का तरीका बेहद शातिराना था। आरोपी सबसे पहले संगठित गैंग से उन लोगों के नाम पर खुले फर्जी बैंक खाते खरीदते थे, जिन्हें वे खुद ऑपरेट कर सकें। इन खातों को अपराध की मिडल लेयर के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

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इसके बाद इन खातों में सुनियोजित तरीके से लेनदेन कर बैंक रिकॉर्ड में इनका क्रेडिट स्कोर (सिबिल) आर्टिफिशियली सुधारा जाता था। जब खाता क्रेडिट योग्य दिखने लगता, तो उन्हीं खातों के आधार पर नामी शोरूम से लग्जरी गाड़ियों पर बैंक लोन लिया जाता था। वाहन मिलने के कुछ समय बाद ही आरोपी जानबूझकर ईएमआई चुकाना बंद कर देते थे और गाड़ियों को या तो गायब कर देते थे या पहले से तैयार नेटवर्क के जरिये बेच देते थे। इससे बैंकों को करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान हुआ और ये लोन एनपीए में तब्दील हो गए। पुलिस ने गिरोह के पास से कुल 16 गाड़ियां बरामद की हैं। इनमें आठ टोयोटा फॉर्च्यूनर, पांच किया सेल्टोस, एक महिंद्रा थार, एक हुंडई क्रेटा, एक हुंडई वेन्यू शामिल हैं। सिर्फ बैंक ही नहीं, गिरोह ने इंश्योरेंस सिस्टम को भी अपना जरिया बनाया।
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ऐसे काम करता था गिरोह
चोरी या क्लोन की गई गाड़ियों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिये इंश्योरेंस पॉलिसी ली जाती थी और बाद में उन्हें दुर्घटनाग्रस्त या चोरी दिखाकर मोटे क्लेम हड़पने की तैयारी की जाती थी। जानकारी के अनुसार यह नेटवर्क बिलासपुर रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी सहित विभिन्न राज्यों के आरटीओ, आरएलए के कर्मचारियों और एजेंटों की मिलीभगत से चल रहा था। गिरोह के सदस्य फर्जी -21, नकली सेल लेटर और फर्जी बैंक एनओसी के आधार पर चोरी की गई या लोन डिफॉल्ट वाली गाड़ियों का नया रजिस्ट्रेशन कराते थे। कई मामलों में टोटल-लॉस या वाटर-डैमेज वाली गाड़ियों के चेसिस नंबर को चोरी की गाड़ियों पर पंच करके क्लोनिंग की जाती थी। इस तकनीक से चोरी का वाहन कानूनी रूप से वैध नजर आने लगता था। इस पूरे खेल में सरकार को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
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