शिमला ग्रीष्मोत्सव में दिखे लोक संस्कृति के विविध रंग
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चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव में लोक संस्कृति के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं। ग्रीष्मोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को रिज मैदान पर पर्यटन विभाग की ओर से आमंत्रित अकरम खान व दल की ओर से बहरूपिया कला का प्रदर्शन किया गया। राजस्थान से आए छह कलाकार लोगों का मनोरजंन कर रहे हैं। इन कलाकारों ने आदिवासी, जोकर, चार्ली, जिंद, क्रूर सिंह, भालू का रूप बनाया है। ये कलाकार रिज मैदान पर घूमकर अपने किरदार से लोगों का मनोरजंन कर रहे हैं।
वहीं, रिज मैदान पर राजस्थान से आए कलाकारों ने राजस्थानी लोक नृत्य की शानदार प्रस्तुति। दल के कलाकारों ने लोक देवता तेजाजी का कच्ची घोड़ी नृत्य सहित चकरी नृत्य, पर्दा नृत्य प्रस्तुति से पर्यटकों व स्थानीय लोगों का मनोरंजन किया। वहीं, राजस्थान से आए सांस्कृतिक दल ने प्रसिद्ध लोक नृत्य कालबेलिया से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। 10 कलाकारों की टीम में चार नर्तकियां और छह कलाकार ढोलक-मंजीरा, खंजरी, पुंगी आदि पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ राजस्थानी लोक संस्कृति की झलक पेश कर रहे हैं।