देवभूमि कुल्लू को देवी-देवताओं का स्वर्ग कहा जाता है। यहां पर हर देवी-देवता का अपना इतिहास है। मणिकर्ण घाटी की फाटी कशावरी के छमाहण गांव के देवता छमाहणी नारायण न्याय के देवता हैं। देवता के पास न्याय के लिए सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि देवी-देवता भी जाते हैं।
देवता के न्याय की महिमा इस कदर है कि जिला के सभी देवी देवताओं ने देवता छमाहणी नारायण पंच का औहदा दिया है। देवता को जिला के अठाहर करडू में देवता छमाहणी नारायण को पंच कहा जाता है। देवता के पास फैसला करने का विशेषाधिकार है।
देवी-देवता जब किसी भी मामले का निपटारा नहीं कर पाते हैं तो देवता छमाहणी नारायण ऐसे मामले को सुलझाते हैं। देवता द्वारा सुनाए गए फैसले को दोनों पक्ष सर्वोच्च मानते हैं। देवता के आदेश को सबको मानना पड़ता है।
कुल्लू के देवी-देवताओं के हैं पंच
इसके अलावा में देश के कोने-कोने से फरियादी अपनी फरियाद लेकर आते हैं। देवता छमाहणी नारायण अपने भक्तों को संतान प्राप्ति का वरदान देते हैं। यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है। वहीं दशहरा उत्सव में देवता हर साल लाव लश्कर के साथ आते हैं।
सात दिनों तक अस्थायी शिविर में रहने के बाद देवता लंका दहन के दिन देवालय की ओर रवाना हो जाता है। हालांकि देवता भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में शामिल नहीं होते हैं, लेकिन इससे पहले देवता रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरते हैं।
देवता छमाहणी नारायण के कारदार मेहर चंद ने कहा कि देवता को जिला कुल्लू के देवी-देवताओं के पंच का विशेषाधिकार है।
देवलुओं ने रखा था धुर विवाद को हल करने का प्रस्ताव
देवताओं ने छमाहणी नारायण को देव सभा में अध्यक्ष बनाया है। मनुष्य से लेकर देवी देवताओं के फैसलों का निपटारा देवता द्वारा किया जाता है। देवता संतान प्राप्ति का वरदान भी देते हैं। दूर-दूर से लोग अपनी मुराद लेकर देवता के दरबार में आते हैं।
दशहरा उत्सव में बालूनाग और श्रृंगा ऋषि के बीच चल रहे धुर विवाद को सुलझाने के लिए देवलुओं ने छमाहणी नारायण के समक्ष इस मामले का निपटारा करने का सुझाव दिया था।
देवलुओं ने कहा था कि छमाहणी नारायण इस मसले को हल करेंगे। हालांकि बाद में इस पर सहमति नहीं बनी।