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अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक कार्यशाला: गंभीरता से साक्ष्य जुटाए जाएं तो पकड़े जा सकते हैं अपराधी

Fri, 23 Sep 2022 10:38 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा

सार

सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सरबजीत सिंह ने चंबा मेडिकल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक कार्यशाला में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में देश और प्रदेश के 100 फोरेंसिक विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। 
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अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक कार्यशाला - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अपराध स्थल पर किस प्रकार से जरूरी साक्ष्य जुटाकर अपराधी को पकड़ा जा सकता है। इसके बारे में सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सरबजीत सिंह ने चंबा मेडिकल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक कार्यशाला में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में देश और प्रदेश के 100 फोरेंसिक विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञों को बताया कि अपराध स्थल पर पहुंचने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए। वहां मौजूद कपड़े, हाथों के निशान और खून के धब्बों सहित अन्य जरूरी साक्ष्य जुटाकर अपराधी को आसानी से पकड़ा जा सकता है। बड़े से बड़ा अपराधी भी अपराध करने के बाद कोई न कोई सबूत छोड़कर जाता है।  इसका सही जांच करके पता लगाया जा सकता है।

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इससे पूर्व भारत में बढ़े रहे छोटे बच्चों के अवैध व्यापार पर उत्तर प्रदेश के एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज बरेली से आए प्रो. जसविंद्र सिंह ने बताया कि बच्चों को विदेशों में ले जाकर बेचा जा रहा है। बच्चों को अपंग बनाकर उनसे भीख मंगवाई जाती है। इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए किस प्रकार से कार्रवाई करनी चाहिए। उसके बारे में उन्होंने विस्तार से प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की। डॉक्टरों पर हो रहे हमलों को लेकर अनांता मेडिकल कॉलेज उदयपुर (राजस्थान) से आए प्रोफेसर डॉक्टर एसके सिंघाल ने जानकारी दी। सरोगेट मातृत्व पर चितंपूर्णी मेडिकल कॉलेज पठानकोट के प्रो. अशोक चनाना ने पत्र पढ़ा। चिकित्सीय लापरवाही पर मेडिकल कॉलेज करनाल से आए प्रो. डॉ. विजय पाल और डॉ. कलपना चावला ने अपने-अपने पत्र पढ़े। प्राचार्य डॉ.  पंकज गुप्ता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में फोरेंसिक एक्सपर्ट अपने-अपने पत्र पढ़ रहे हैं। इसमें फोरेंसिक विशेषज्ञों सहित अन्य प्रतिभागियों को जरूरी जानकारी मिल रही है। 

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