सरकारी भूमि से संबंधित सूचना नहीं देने पर मुख्य सूचना आयुक्त ने हिमाचल के चार जिलों के उपायुक्तों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। सात अगस्त को इसकी सुनवाई हुई थी।
इसके बाद मुख्य सूचना आयुक्त ने मंडी, हमीरपुर, शिमला और कुल्लू के उपायुक्तों को नोटिस भेजते हुए सात दिन के भीतर सूचना देने को कहा है। केंद्रीय बिहार नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता देव आशीष भट्टाचार्य ने राज्य सूचना अधिकारी (मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश) से सूचना अधिकार 2005 की धारा छह के तहत सूचना मांगी थी कि राज्य में कुल कितनी सरकारी भूमि है?
कितनी भूमि पर अवैध कब्जे है? रिकार्ड में कितनी जमीनें खाली करवाने के आदेश हुए और कितनी भूमि व्यवसायिक एवं रिहायश के लिए अतिक्रमित की गई है? देव आशीष भट्टाचार्य ने बिलासपुर में पत्रकार वार्ता बुलाकर बताया था कि उन्होंने चीफ इन्फॉरमेशन कमीशन के पास अपील की थी कि जिलों से उन्हें जो जानकारी दी गई वह अधूरी और गलत थी।
स्टेट इन्फॉरमेशन कमीशन की ओर से रजिस्ट्रार के माध्यम से पत्र संख्या एसआईसी-1(ए)0525/13-14 के तहत राजस्व विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी को आदेश दिए थे कि सभी जिलों से डाटा एकत्रित कर इसे नए सिरे से तैयार कर भेजा जाए। इसके साथ ही तहसीलदारों को इसकेहलफनामे दाखिल करने को भी कहा गया है। यह तमाम जानकारी 21 जुलाई से पहले देने के आदेश हुए थे।
इनमें से चार जिला कुल्लू, मंडी, हमीरपुर और शिमला से न तो सूचना मिली और न ही हलफनामे। हालांकि, कुल्लू के उपायुक्त ने जिले में सेटलमेंट प्रोसेस चलने की बात कही है। सात अगस्त 2014 को राज्य सूचना आयुक्त ने इस संदर्भ में चारों जिलों के उपायुक्तों को आदेश एवं कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि सात दिन के भीतर पीआईओ (डिप्टी सेक्रेटरी राजस्व) को यह सूचना भेजना सुनिश्चित करें।
इस अग्रिम आदेश को ही कारण बताओ नोटिस मानते हुए यह भी कहा गया है कि यदि सात दिन के भीतर सूचना नहीं दी गई तो क्यों न उनके खिलाफ पेनल एक्शन लिया जाए।