सरकार ने भले ही उद्योगों में हिमाचलियों को 70 फीसदी रोजगार देना सुनिश्चित किया है, लेकिन राज्य के उद्योगों को सूबे के बेरोजगार युवा नहीं मिल रहे हैं। उद्योगों में नौकरी के लिए रोजगार मेले और कैंपस प्लेसमेंट करवाए जाते हैं। इनके माध्यम से जिन बेरोजगार युवाओं का चयन किया जाता है, लेकिन इनमें अधिकांश युवा नौकरी ज्वाइन नहीं करते। यह भी सत्य है कि जो युवा उद्योगों में नौकरी करते हैं, वे लंबे समय तक सेवाएं इमानदारी से देते हैं।
सीआईआई से जुड़े उद्योगपतियों की एक ही समस्या है कि सरकार ने उद्योगों में हिमाचलियों को 70 फीसदी रोजगार देना सुनिश्चित किया है। उद्योगों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यही है कि हिमाचल में स्थापित उद्योगों को 70 फीसदी हिमाचली नहीं मिल पा रहे हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि उद्योगों में नौकरी के लिए कई बार रोजगार मेले लगाए जा चुके हैं। इनमें ढाई सौ से पांच सौ लोग नौकरियों के लिए आते हैं। इनमें तीस फीसदी बेरोजगार हिमाचली आते हैं। 15 या 20 फीसदी नौकरी ज्वाइन करते हैं, परंतु लंबे समय तक नौकरी में नहीं रहते। अंत में उद्योगों में दस फीसदी हिमाचली ही नौकरी में रह जाते हैं।
ये बोले सीआईआई के उत्तर भारत के अध्यक्ष
सीआईआई के उत्तर भारत के अध्यक्ष सचित जैन कहते हैं कि हिमाचल में स्थापित उद्योगों में 70 फीसदी हिमाचलियों को रोजगार देना संभव नहीं होता। राज्य में रोजगार मेले भी लगाए जाते हैं। कैंपस प्लेसमेंट भी किया जाता है।
बावजूद इसके 70 फीसदी हिमाचली रोजगार हासिल करने को नहीं पहुंचते। तीस फीसदी हिमाचली ही रोजगार के लिए आगे आते हैं। इनमें भी दस फीसदी नौकरी में लगते हैं। जो नौकरी में लग जाते हैं, वे इमानदारी से काम करते हैं। उद्योगों में लगने के बाद भी रोजगार दफ्तरों मेें उनके नाम पंजीकृत रहते हैं।