3. महीनों पानी में गुजारना कैसा अनुभव रहा? किस तरह दिन-रात गुजारते थे?
24 घंटे में से चार घंटे वॉच करनी होती थी। कई बार छह से 12 घंटे वाच करना पड़ता था। अमूमन दिन वाच के अलावा अन्य कार्यों में निकल जाता था। समय मिलने पर स्पेशल कुक, मूवी देखकर समय गुजारते थे।
4. घर वापसी कब होगी और मिशन सफल होने पर जश्न कहां और कैसे मनाया जाएगा?
मीडिया के साथ लगातार अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। जून के आखिरी तक कुल्लू के मौहल स्थित अपने घर पहुंचने की उम्मीद है। परिजनों संग जश्न होगा। स्कूल व दोस्तों से भी मुलाकात होगी।
5. अब आपकी अगली योजना क्या रहेगी?
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने जा रहे हैं। फिर राष्ट्रपति से भी मिलने की योजना है। अगली योजना पर अभी निर्णय नहीं लिया है।
6. क्या आप दोबारा नाव में सागर परिक्रमा पर जाना चाहोगे?
बोट के माध्यम से सागर परिक्रमा करना उपलब्धि है। अगर दोबारा मौका मिला तो अवश्य विचार करूंगी। 17 मीटर लंबी बोट में सफर रोमांच और जोखिमों से भरा रहा। यह कभी नहीं भूल पाएगा।
7. सागर परिक्रमा के अच्छे अनुभव?
सागर परिक्रमा के दौरान बहुत कुछ सीखा है। अलग-अलग संस्कृति, इंडियन रूट, वाइल्ड लाइफ देखने को मौका मिला है। बोट में रहते हुए घर पहुंचने पर खुशी होने का एहसास था। लेकिन बोट के गोवा पहुंचने पर खुशी के साथ गम भी था कि अब समुद्र के बीच शांति और अन्य चीजें खत्म हो गई है।
8. परिजनों से किस तरह संपर्क होता था?
शुरुआती दौर में परिजनों से ईमेल से संपर्क करते थे। बोट में वाईफाई था। इससे 100 एमबी डाटा दिन में खर्च किया जा सकता है। व्हाट्सएप कॉलिंग के माध्यम से परिजनों को संपर्क किया जाता था।
9. नाव में आपकी क्या भूमिका रही, दिनचर्या कैसे रहती थी?
नाव छोटी और काम बहुत अधिक रहते थे। सभी हर काम में एक्सपर्ट थे और समय को देखते सभी काम करते थे।
10. किस तरह के मौसम में आपने नाव में सवार होकर सागर परिक्रमा की?
दिन-रात, बारिश हो या तूफान, बर्फबारी में भी बोट सेल की। न्यूनतम माइनस सात डिग्री और अधिकतम 40 डिग्री ,जहां हवा नाममात्र भी न हो, तापमान में बोट चलाई। विपरीत परिस्थितियों के बीच भी सेलिंग जारी रखी।