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Dilwar Khan Funeral: मां का रो रोकर बुरा हाल, पिता ने कही ये बात, ग्रामीण बोले- खून का बदला खून

Thu, 25 Jul 2024 03:37 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना

सार

28 साल का दिलवर खान श्रीनगर के कुपवाड़ा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में बलिदान हो गया। दिलवर के पिता कर्मदीन जहां एक ओर बेटे के देश की रक्षा के लिए कुर्बान होने से गर्व महसूस कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर बेटे की जुदाई का गम छलक रहा है।
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डिजाइन फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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श्रीनगर के कुपवाड़ा में बंगाणा उपमंडल के घरवासड़ा निवासी दिलवर खान का आतंकियों के साथ मुठभेड़ में बलिदान हो गया है। उनके पैतृक गांव में दिलवर की पार्थिव देह पहुंचने से पहले दिलवर की मां का रोकर बुरा हाल है। दिलवर खान का पांच साल का बेटा जुनैज है, जो पिता से मिलने का इंतजार ही करता रह गया। वहीं, दूसरी ओर दिलवर के पिता कर्मदीन जहां एक ओर बेटे के देश की रक्षा के लिए कुर्बान होने से गर्व महसूस कर रहे हैं तो वहीं, दूसरी ओर बेटे की जुदाई का गम छलक रहा है।

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'दिलवर का बलिदान देश के लिए फक्र की बात'
कर्मदीन ने कहा कि मंगलवार शाम को ही दिलवर से बात हुई थी और उन्होंने अपने बेटे दिलवर से एक ही बात कही कि बेटा इंसान बनकर रहना और इंसानों के साथ रहना। उन्होंने कहा है कि दिलवर का बलिदान देश के लिए फक्र की बात है। उनके पैतृक गांव में दिलवर के बलिदान होने से पूरा क्षेत्र गमगीन है। जहां एक ओर गर्व महसूस कर रहे हैं तो दूसरी ओर दिलवर के जाने का गम भी है।
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'खून का बदला खून हो'
वहीं, ग्रामीण युसूफ दीन का कहना है कि खून का बदला खून से लिया जाए और आतंकियों से लोहा लेते दिलवर बलिदान हुए हैं। उन आतंकियों की भी मौत के घाट उतारा जाए। दिलवर की मां के मुख से जहां एक ओर अपने बेटे के जाने के गम में चीख पुकारें निकल रही है तो वहीं, दूसरी ओर शहादत का जाम पीने के बाद दिलवर की मां ने कहा कि सरकारों को भी सोचना चाहिए जिनका बेटा देश की रक्षा के लिए बलिदान हुआ है। फर्क तो उस परिवार को पड़ता है। सरकारों को नहीं।

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राजकीय सम्मान के साथ दी जाएगी विदाई 
दिलवर के पैतृक गांव से लेकर तलाई तक 5 किलोमीटर की रेंज तक लोगों के आने-जाने की लंबी कतारें लगी हुई हैं। अभी दिलवर की अंतिम विदाई होने जा रही है। जहां पर प्रशासन और सेना की ओर से पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी जाएगी देश की रक्षा करते हुए शरहद पर दिलवर वीरगति को प्राप्त हुए हैं और आतंकियों को ढेर कर दिया है। दिलवर के बलिदान होने से उसकी मां की आंखें बेटे के जाने की जुदाई का गम बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। इलाके में माहौल दिलवर के बलिदान होने के बाद पूरी तरह से गमगीन हो गया है।
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