प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया ताम्रपत्र
वर्ष 1972 में बिलासपुर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से उन्हें ताम्रपत्र दिया गया। परिवहन समेत अन्य सुविधाएं भी मिलीं। वर्ष 2004 में 84 वर्ष की उम्र में ओंकार चंद का निधन हो गया। देशराज बताते हैं कि परिवार को सरकार की ओर से मिली सुविधाओं से शिकायत नहीं है। मलाल इस बात का है कि उनके पिता और ऐसे अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सार्वजनिक स्मृति में वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। परिवार की मांग है कि ओंकार चंद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम स्कूलों में दर्ज किए जाएं।