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15 की उम्र में आजादी, 24 में मैंने खोया देश: दलाईलामा

Mon, 08 Jun 2020 10:22 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
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तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा
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तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि मैं 85 साल का हूं। 14 या 15 साल की उम्र में अपनी आजादी खो दी। जब मैं 24 साल का था, तब अपना देश खो दिया था। 1959 के बाद से तिब्बत पीड़ा से भरा हुआ है। तिब्बत और भारत के अतीत से घनिष्ठ संबंध हैं। आज भारत एक लोकतांत्रिक देश है, इसलिए 60 वर्षों तक मैंने यहां मिली स्वतंत्रता का आनंद लिया है। तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने मैकलोडगंज स्थित अपने निवास स्थान में दक्षिण पूर्वी एशिया के 700 लोगों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद किया। 

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प्रतिभागियों ने कहा कि कोरोनो वायरस के प्रकोप ने दुनिया में बदलाव लाकर चिंता और भय को जन्म दिया। बहुत से लोग बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। दुनिया अधिक जटिल हो गई है। इस मुश्किल दौर में युवाओं ने दलाईलामा से मार्गदर्शन मांगा। दलाईलामा ने कहा कि जब हमारे अद्भुत दिमाग विनाशकारी भावनाओं के नियंत्रण में होते हैं तो हम अपने लिए समस्याएं पैदा करते हैं। चूंकि, हमारे पास उन्हें कम करने की क्षमता भी है, इसलिए इन समस्याओं से निपटने की जिम्मेदारी भी हमारी है। हमें उस एकता को याद रखना होगा जो हमें एकजुट करती है। दूसरों को यह याद दिलाना मेरी पहली प्रतिबद्धता है।

 भारत में हम दुनिया की सभी प्रमुख आस्था परंपराओं को एक साथ देख सकते हैं। दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश इसका जीता-जागता उदाहरण है कि अंतर-धार्मिक सद्भाव संभव है। कहा कि तिब्बत के संबंध में मेरी मुख्य चिंताओं में से एक तिब्बती भाषा का संरक्षण है। मैं तिब्बत के प्राकृतिक वातावरण के बारे में भी चिंतित हूं। तिब्बत के पठार से एशिया की कई महान नदियां निकलती हैं, जिससे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम, चीन और आगे पानी की महत्वपूर्ण आपूर्ति होती है। इस समय जब ग्लोबल वार्मिंग लगातार गंभीर होती जा रही है, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि तिब्बत की पारिस्थितिकी की रक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि अहिंसा आज की दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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