हिमाचल प्रदेश में करोड़ों की अघोषित संपत्ति रखने वालों के खिलाफ शिकंजा कसने जा रहा है। आयकर विभाग प्रदेश में अघोषित संपत्तियों की खरीद की सूचना एकत्र कर रही है।
जिलों के डीसी तथा राजस्व विभाग के साथ मिलकर विभाग ऐसी संपत्तियों को खरीदने वालों और उनको खरीदने के लिए रुपये देने वालों का सारा कच्चा चिट्ठा तैयार करने में जुटी है। 30 सितंबर तक अघोषित संपत्तियों को अपनी घोषित कर अपने नाम कराने की छूट भी दी गई है।
इस मियाद के पूरा होने के बाद केंद्र सरकार और आयकर विभाग ऐसी संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू करेगी। आयकर विभाग शिमला के प्रमुख आयकर आयुक्त प्रीतम सिंह ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्होंने हिमाचल के लोगों के नाम से संपत्तियों को खरीदा है।
सरकार ने दी है 30 सितंबर तक की मोहल्लत
ऐसे ही लोगों को आखिरी मौका देने के लिए केंद्र सरकार ने आय घोषित योजना शुरू की जिसकी मियाद 30 सितंबर को खत्म हो रही है। सिंह ने कहा कि जो लोग इस मियाद के भीतर अपनी संपत्तियों को घोषित कर आयकर विभाग को जानकारी दे देंगे, उनके खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन जो लोग अपनी ऐसी संपत्तियों की जानकारी नहीं देंगे उनकी संपत्तियों को 30 सितंबर के बाद केंद्र अधिगृहीत करना शुरू कर दिया जाएगा।
अघोषित संपत्तियों के लिए ही बने बेनामी ट्रांजेक्शन प्राहिबिशन बिल में संशोधन किए गए हैं। जिसके बाद इस कानून के तहत उन संपत्तियों को सरकार अपने कब्जे में ले सकेगी। प्रीतम सिंह ने बताया कि फिलहाल अगर कोई व्यक्ति अपनी ऐसी संपत्तियों की जानकारी 30 सितंबर से पहले आयकर विभाग के साथ साझा करता है तो उसे संपत्ति अपने नाम कराने के लिए 2017 सितंबर तक का समय दिया जाएगा, साथ ही उसे इस संबंध में आगे कभी कोई पूछताछ भी नहीं की जा सकेगी।
भारी संख्या में लोगों के पास अघोषित संपत्तियां
सिंह ने बताया कि हिमाचल में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके पास अघोषित संपत्तियां तथा आय है। उनमें से काफी संख्या में लोग आगे आए हैं और उन्होंने आयकर विभाग से अपनी संपत्तियों तथा आय की जानकारी साझा की है।
बताया कि ऐसे लोगों को 45 प्रतिशत टैक्स चुकाकर अपनी संपत्तियों को कानूनी रूप से अपना बनाने का मौका मिल रहा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि 30 सितंबर के बाद वित्त मंत्रालय के निर्देश के अनुसार अवैध आय और संपत्तियों के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।