विधानसभा चुनाव की तारीख के एलान के साथ ही सूबे में आदर्श आचार संहिता लागू होने के साथ ही विभिन्न तरह के कार्यों पर भी रोक लग गई है।
आदर्श आचार संहिता लागू होने के साथ ही प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादलों पर प्रतिबंध लग गया है।
किसी भी तरह के उद्घाटन या शिलान्यास और किसी भी नए प्रोजेक्ट को न तो वित्तीय स्वीकृति दी जा सकेगी, न बजट जारी नहीं किया जा सकेगा। कोई नई घोषणा भी मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं कर सकेंगे। नई नियुक्ति पर भी ब्रेक लग जाएगा।
मंत्रिमंडल की कोई बैठक भी नहीं हो सकेगी। इसके अलावा सत्ताधारी दल की उपलब्धियों का सरकारी खर्च पर प्रसार प्रचार नहीं किया जा सकेगा। बिना अनुमति के लाउड स्पीकर का भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। विश्रामगृहों, डाक बंगलों के अलावा अन्य सरकारी आवासों पर काबिज सत्ताधारियों को खाली करना होगा।
घोषणा पत्र के लिए ये रहेगी शर्त
आदर्श आचार संहिता में इस बार राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणापत्रों को भी शामिल किया गया है। राजनीतिक दलों को यह बताना होगा कि घोषणापत्र में किए जाने वाले वायदों को वे कैसे पूरा करेंगे। यह भी बताना होगा कि इसके लिए वित्तीय व्यवस्था किस तरह करेंगे।
चुनावी दौरों को सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल पर रोक
चुनावी दौरों के लिए मंत्रियों को सरकारी वाहनों के इस्तेमाल की भी अनुमति नहीं होगी। किसी भी निजी या राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने के लिए वे सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इनका इस्तेमाल सिर्फ ऑफिस से घर और घर से ऑफिस जाने के लिए किया जा सकेगा।
इन कार्यक्रमों पर भी रहेगी आयोग की नजर
आचार संहिता लागू होने के साथ ही सूबे में होने वाले किसी भी तरह के सामूहिक कार्यक्रम पर भी आयोग की नजर रहेगी। शादी हो, मुंडन या जन्मदिन, या किसी अन्य तरह का धार्मिक अनुष्ठान।
आयोग हर ऐसे कार्यक्रम पर नजर रखेगा। साथ ही अगर प्रत्याशी उस कार्यक्रम में शिरकत करेगा तो उसकी वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
आचार संहिता की खास बातें
- किसी दल या प्रत्याशी को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जो विभिन्न जातियों, धर्मों या भाषाई समुदायों के बीच विरोध या मतभेद पैदा करे या पहले से मौजूद मतभेदों को बढ़ाए।
- व्यक्तिगत जीवन के पहलुओं पर किसी तरह की टिप्पणी या बयान नहीं दिया जाना चाहिए।
- आलोचना या बयान ऐसे आरोपों पर जिनकी सत्यता स्थापित न हुई हो या तोड़-मरोड़ कर कही गई बातों पर आधारित नहीं होनी चाहिए।
- वोट प्राप्त करने के लिए जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही राजनीतिक दल प्रचार के लिए धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल न हो।
- ऐसे कार्य न हों, जो निर्वाचन विधि के अधीन भ्रष्ट आचरण और अपराध हैं। इनमें मतदाताओं को रिश्वत देना, परेशान करना, मतदान केंद्र के सौ मीटर के भीतर वोट मांगना, प्रचार बंद होने के बाद भी सार्वजनिक सभाएं करना और मतदाताओं को अपने वाहन से मत डालने के लिए ले जाना और वापस लाना।
प्रत्याशी और पार्टी के लिए ये शर्तें
- प्रत्याशी या पार्टी किसी दूसरे व्यक्ति या प्रत्याशी के कार्यों का विरोध करने के लिए उनके घर के बाहर प्रदर्शन नहीं करेंगे। बिना संपत्ति मालिक की अनुमति के उसके घर या दीवार पर होर्डिंग, बैनर, झंडा या पोस्टर न लगाएं।
- दल और प्रत्याशी दूसरे दलों के कार्यक्रमों में बाधा नहीं पहुंचाएंगे। जुलूस आदि ऐसे रास्ते से नहीं ले जाना चाहिए, जहां पहले से दूसरे दल या प्रत्याशी की सभा या जुलूस हो।
- प्रस्तावित सभा के स्थान और समय के लिए स्थानीय पुलिस अधिकारियों से पूर्व में अनुमति लेनी चाहिए, ताकि वह कानून और ट्रैफिक व्यवस्था कर सकें।
- प्रस्तावित सभा के लिए लाउड स्पीकर या किसी अन्य सुविधा को हासिल करने के लिए दल या प्रत्याशी को पहले आवेदन करना चाहिए।
- सभा आयोजक सभा में विघभन डालने वाले लोगों से निपटने को पुलिस की मदद लें, खुद कोई कार्रवाई न करें।
आचार संहिता के फेर में फंसे सरकार के बड़े फैसले
हिमाचल में आदर्श आचार संहिता के लागू होने से सरकार के बड़े फैसले लटक गए हैं। सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में भले ही साधु-संतों को जमीन बेचने का अधिकार देने के लिए सिलिंग एक्ट में संशोधन करने को मंजूरी दी है लेकिन इसे लागू करने के लिए सरकार की ओर से अध्यादेश नहीं लाया गया।
इसी तरह उद्योगपति हिमाचल से बाहर न जाएं इसको लेकर भी सरकार ने पूंजीपतियों को टैक्स में छूट देने का फैसला लिया था। इस मामले में सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं हुई है। चाय बागान भूमि उपयोग के नियमों को बदलने और सोने की रिफाइनरी को राहत देने का मामला भी लटक गया है।
पांच कैबिनेट की बैठकें, अधिकांश में नहीं हुई अधिसूचना
हिमाचल सरकार ने एक महीने के भीतर करीब पांच कैबिनेट की बैठकें की है। अधिकांश मामलों को अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इसमें उपतहसील को तहसील बनाने का दर्जा, स्वास्थ्य केंद्र खोले जाने, स्कूलों का दर्जा बढ़ाया जाना, रिक्त पदों को भरे जाना आदि अनेकों मामले हैं, जो लटक गए हैं।
सरकार का कोई भी निर्णय तक सही नहीं माना जाता है, जब तक उसकी अधिसूचना आचार संहिता से पहले लागू नहीं हो जाती है। सरकार को अब जनहित के फैसले पर निर्णय लेने के लिए इलेक्शन कमीशन की अनुमति लेनी होगी। अपनी मर्जी से सरकार कोई भी निर्णय नहीं ले सकेंगी।