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'सेकुलर' शब्द ने भारत को बना दिया धर्महीन

Sun, 26 Apr 2015 04:35 PM IST
सुरेश शांडिल्य/ अमर उजाला, शिमला
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘सेकुलर’ शब्द पर विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय के बीच चल रहे पत्राचार से तूल पकड़ गया है।
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शिमला के एक लेखक रामकृष्ण शर्मा ने पीएमओ से संविधान की प्रस्तावना से ‘सेकुलर’ शब्द हटाने को एक पत्र भेजा। पीएमओ ने इस पर गृह मंत्रालय को उपयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए। अब कोई एक्शन लिए बगैर गृह मंत्रालय ने और स्थिति स्पष्ट करने के लिए यह पत्र पीएमओ वापस भेज दिया है।

लेखक रामकृष्ण शर्मा ने पत्र में तर्क दिया है कि सेकुलर का एक अर्थ धर्महीन होता है। भारत को धर्महीन कहना उचित नहीं है, वो भी देश के संविधान की प्रस्तावना में।
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प्रधानमंत्री कार्यालय ने गृह मंत्रालय को दिए निर्देश

उन्होंने इस शब्द को प्रीएंबल से हटाने के लिए यह मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिए कि इस पर उपयुक्त कार्रवाई की जाए।

रामकृष्ण कौशल ने जब गृह मंत्रालय से आरटीआई में इस पत्र पर हुई कार्रवाई से अवगत करवाने को कहा, तो पिछले दिनों गृह मंत्रालय के उपनिदेशक वीके राजन ने बतौर केंद्रीय जनसूचना अधिकारी जानकारी दी।

इस पत्र को प्रधानमंत्री कार्यालय को वापस भेजा गया है। पीएमओ से जानना चाहा है कि इस पर गृह मंत्रालय को क्या करना है।

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प्रस्तावना से हटे ‘सेकुलर’ शब्द

लेखक का दावा है कि ऑक्सफोर्ड और वैबस्टर शब्दकोष के अनुसार ‘सेकुलर’ शब्द का अर्थ नॉट रिलिजियस यानी धर्महीन या डिफरेंट फ्रॉम चर्च एंड रिलीजन यानी चर्च या धर्म से भिन्न होना है।

भारत कभी भी धर्महीन, अधर्मी या धर्म से भिन्न नहीं रहा है। भारत की पहचान ही धर्म से है, न कि धर्महीन होने से। इसलिए सेकुलर शब्द को प्रस्तावना से हटाया जाना चाहिए।

इसके स्थान पर उपयुक्त शब्द का इस्तेमाल होना चाहिए। उनका कहना है कि संविधान की संरचना के समय प्रस्तावना में यह शब्द था ही नहीं। इसे 27 साल बाद जोड़ा गया।
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