कर्मचारी नेता अपनी प्रेस वार्ता में व्यस्त रहे और कार ओल्ड पावर हाउस मार्ग पर बेतरतीब खड़ी कर गए। बस फिर क्या? ट्रैफिक जाम और स्थिति काबू से बाहर।
जाम में फंसे लोग गाड़ी के मालिक के साथ संपर्क साधने की कोशिश करते रहे, लेकिन बात बनी नहीं। दूर तक वाहनों की लंबी कतार जरूर लग गई।
एंबुलेंस और बिजली बोर्ड का जरूरी सामान लेकर जाने वाले वाहन भी फंस गए। लोगों ने सूचना पुलिस को दी। यातायात पुलिस मौके पर पहुंची।
काफी मशक्कत के बाद भी जब गाड़ी के मालिक से संपर्क नहीं हुआ तो यातायात बहाल करने के लिए क्रेन बुलानी पड़ी और गाड़ी को उठाना पड़ा। लिहाजा करीब एक घंटे सड़क जाम रही और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ट्रैफिक इंचार्ज ने कहा कि लोगों ने मार्ग बाधित होने की सूचना दी। मौके पर पहुंचकर गाड़ी के मालिक से संपर्क साधाने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
मार्ग बहाल करने के लिए क्रेन बुलानी पड़ी। 500 रुपये गलत पार्किंग का चालान काटा है। वहीं एक हजार के करीब क्रेन आदि का खर्चा आएगा।
उधर, हिमाचल प्रदेश सर्व कर्मचारी, पेंशनर, श्रमिक, युवा बेरोजगार संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष एवं प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष गोपाल दास वर्मा ने कहा कि सरकार के खिलाफ बोलने पर यह कार्रवाई हुई है।
गाड़ी क्रेन से उठाने का तरीका भी गलत था। उनका सात से आठ हजार का नुकसान हुआ है। वहां छह सात अन्य गाड़ियां भी लगी थी, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गोपाल दास वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तथा उन्हें नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र देना चाहिए। वे सोलन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि संयुक्त मोर्चा ने वीरभद्र सिंह को पद से हटाने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान चला रखा है। मुख्यमंत्री, प्रतिभा सिंह व विक्रमादित्य सिंह की गलत नीतियों के बारे में जनता को बताया जा रहा है।