खेतों में खड़े पेड़ों के लिए ली गई अनुमति और साफ कर दिए जंगल
सूत्रों की मानें तो खैर माफिया ने खेतों या निजी भूमि से खैर काटने की अनुमति ली थी। लेकिन इसकी आड़ में जंगल से हजारों पेड़ों को काट दिया। इस पर कई सवाल खड़े होते हैं। अनुमति दिए जाने से पहले लंबी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। बता दें कि भूमि की जंगल झाड़ी किस्म से खैर आदि पेड़ों के कटान पर रोक है। इसमें चाहे भूमि मलकीयत हो या फिर सरकारी हो, खैर का पेड़ नहीं काटा जा सकता। मौजा त्रिलोकपुर में जिस भूमि में खैर कटान हुआ है, वह मलकीयत बताई जा रही है। भूमि की किस्म जंगल झाड़ी है। खैर की लकड़ी की बाजार में बड़ी मांग है। इसकी कीमत लाखों में रहती है। बताया जाता है कि एक अच्छा खैर का पेड़ एक लाख रुपये तक बिकता है। ऐसे में करोड़ों के आसपास मामला हो सकता है।
जंगल झाड़ी किस्म की भूमि, चाहे वह मलकीयत ही क्यों न हो वहां से खैर के पेड़ काटने पर पाबंदी है। मौजा त्रिलोकपुर में कई आवेदनकर्ताओं ने निजी भूमि से खैर के पेड़ काटने को लेकर अनुमति ली है। मलकीयत जंगल झाड़ी भूमि किस्म से खैर के पेड़ काटे जाने को लेकर जानकारी नहीं है।- अवनी भूषण राय, डीएफओ वन विभाग नाहन