वर्ष 2015-16 में सरकार ने श्रीनयना देवी क्षेत्र में निजी भूमि से खैर कटान से प्रतिबंध हटाया। साथ ही वन विभाग को सरकारी जंगलों से सूखे और गिर चुके 700 खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति दी।
इसी की आड़ में वन काटुओं में क्षेत्र के पांचों वन खंडों से खैर के पेड़ों का सफाया कर दिया। यह कटान 2017 में भी जारी रहा। अब यहां पर पेड़ों के ठूंठ और खोदी गई जड़ें ही बची हैं। सूत्र बताते हैं कि इसमें कई नेताओं और रसूखदारों का भी हाथ हो सकता है। विभाग के अधिकारी और गार्ड मूकदर्शक बने रहे।
इन पांच वन खंडों में हुआ अवैध कटान
श्रीनयना देवी क्षेत्र के तहत आने वाले पांच वन खंडों सलोआ, भाखड़ा ग्वालथाई, बड़ोह, कोट और बस्सी में अवैध खैर कटान हुआ है। इस बारे में स्थानीय लोगों ने वन विभाग को शिकायत भी की, लेकिन छानबीन न होने के कारण लोगों ने पीएमओ को पत्र लिखा। करीब तीन महीने से विजिलेंस जांच में जुटी हुई है।
मामले की विजिलेंस जांच जारी है। सहयोग के लिए विभाग ने विजिलेंस को कर्मचारी-अधिकारी दिए हैं। इस मामले में वे कुछ नहीं कह सकते। -अजीत कुमार ठाकुर, वन अरण्यपाल