शिमला के निजी और सरकारी स्कूलों में कैंसर पीड़ितों की मदद के नाम पर चंदा उगाही का गोरखधंधा चल रहा है। विभाग को इसकी भनक तक नहीं है। लखनऊ की एक एनजीओ खुलेआम स्कूलों में जाकर छात्रों को इनाम का प्रलोभन देकर अधिक से अधिक चंदा एकत्र करने को कह रही है।
सरकारी और निजी स्कूलों ने भी एनजीओ को अनुमति देकर लूट की खुली छूट दे रही है। ये एकत्र किया जाने वाला चंदा सही मायने में कैंसर पीड़ितों के कल्याण में इस्तेमाल हो रहा है या एनजीओ इसे अपने लिए रख रखी रही है। इसका कोई हिसाब नहीं है।
ऐसा ही एक मामला राजधानी के एक प्रतिष्ठित सरकारी स्कूल में सामने आया है। जिसमें छात्र चंदा एकत्र कर रहे हैं। प्रदेश की एक एनजीओ उमंग फाउंडेशन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल उक्त स्कूल में इसकी जांच की बल्कि, चंदे के नाम पर दी जाने वाली रसीद में दिए गए लैंडलाइन नंबर पर ही जांच पड़ताल की।
इसमें उक्त टेलीफोन नंबर पर कैंसर पीड़ित बच्ची की मदद मांगी गई तो संस्था के प्रतिनिधियों ने जवाब दिया कि वे कैंसर पीड़ितों की मदद ऐसे नहीं करते, वो तो सिर्फ इसको लेकर प्रचार प्रसार ही करते हैं। चंदा एकत्र कर रही कंपनी के ऐसे प्रतिनिधि शहर और पूरे प्रदेश भर में सक्रिय हैं।
उमंग फाउंडेशन ने सीएम, प्रधान सचिव शिक्षा को लिखा पत्र
उमंग फाउंडेशन ने मामले की लिखित में मुख्यमंत्री और प्रधान सचिव शिक्षा से शिकायत कर ऐसे अवैध रूप से छात्रों को माध्यम बना धन एकत्र किए जाने की प्रक्रिया को तुरंत बंद करवाने और इस काम को अंजाम दे रही संस्था के प्रतिनिधियों की धरपकड़ करने की मांग की है। इस मामले की उन्होंने उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर जांच करवाए जाने की मांग की है।
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा कि लखनऊ की यह संस्था किसकी अनुमति से निजी और सरकारी स्कूलों में जा कर छात्रों एक चंदा एकत्र करवा रही है, मामला गंभीर है, इसलिए इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। यह संस्था प्रदेश के कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए अब तक एक पैसा तक खर्च नहीं किया है, ओर न ही वे करते है, यह बात संस्था के प्रतिनिधि ने मानी भी है।
लालपानी के छात्र एकत्र कर चुके थे पैसा
वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लालपानी में जाकर लखनऊ की कैंसर रोगियों की मदद के लिए कथित तौर पर कार्य करने वाली संस्था छात्रों से पैसे एकत्र करवा रही थी। इसमें हजारों की राशि छात्र एकत्र कर चुके हैं। इस काम में सैकड़ों छात्र लगे हुए हैं।
उधर स्कूल के प्रधानाचार्य एलआर भारद्वाज का कहना है कि कलेक्शन की उन्हें जानकारी नहीं थी, जैसे ही उन्हें मालूम हुआ उन्होंने एसएमएस गेटवे के माध्यम से अभिभावकों को मेसेज कर इस तरह कोई भी पैसा एकत्र न किए जाने की सूचना दे दी। वहीं प्रार्थना सभा में सभी छात्रों को एकत्र किए पैसे दानकर्ताओं को लौटाने को कहा दिया गया है।
छात्रों को अधिक धन एकत्र करने को दिया जाता है ईनाम का लालच
स्कूलों को माध्यम बनाकर चल रहे इस ठगी के कारोबार में छात्रों को संस्था की एक रसीद दी जाती है, जिसमें छात्र दान देने वाले का नाम, रुपये का ब्योरा लिखना होता है। पर्ची में कैंसर रोग के लिए कुछ जानकारी छपी हे।
छात्र को पैसा एकत्र किए जाने पर क्या क्या पुरस्कार दिए जाएंगे, यह अंकित किया गया है। दान देने वाले को कोई रसीद तक नहीं दी जाती है। पर्ची में संस्था के अलग अलग राज्यों के कार्यालय भी लिखे हैं।