अब दूसरा लाट चिहिन्त सैंपलिंग के बाद बीआरएनएस में भेजा जाएगा। दस दिन के भीतर सैंपल की बीआरएनएस में जांच होना जरूरी है। वहीं अशुद्ध पानी को लेकर प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
कजाकिस्तान, आस्ट्रेलिया पर निर्भरता
बता दें कि भारत अब भी यूरेनियम के लिए कजाकिस्तान, आस्ट्रेलिया व अन्य देशों पर निर्भर है। इससे परमाणु संयंत्रों को स्थापित करने या पहले से स्थापित संयंत्रों का विस्तार करने में यूरेनियम की कमी आड़े आ रही है। साथ ही परमाणु हथियार विकसित करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
इन जिलों में किया गया सर्वे
पानी की जांच के लिए ऊना, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, शिमला और किन्नौर को चुना गया था। पानी में यूरेनियम की मात्रा का पता लगाने के लिए आईआईटी प्रबंधन ने लाखों रुपये से दो मशीनें खरीदी हैं। यूरेनियम के साथ इन मशीनों से पानी में मौजूद हल्की सी अशुद्धि का भी पता चल जाएगा।