नई बीमारियां और कीट पनप रहे हैं। परागण पर भी असर पड़ रहा है। भविष्य में यह चुनौतियां कम नहीं होंगी, बल्कि और अधिक बढ़ेंगी। बागवान सामूहिक रूप से उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन कर सकें, इसके लिए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाकर काम करना जरूरी है। डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि हिमाचल के बागवानों को मल्टी कमोडिटी क्रॉप कलस्टर मॉडल अपना कर एक ही ढांचे के अंतर्गत कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। क्लस्टर मॉडल से न केवल उत्पादन लागत घटेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच आसान होगी।
कांट्रैक्ट फार्मिंग से मिलेगा पक्का बाजार और दाम की गारंटी
कांट्रैक्ट फार्मिंग को भले ही कुछ लोग नकार रहे हैं लेकिन हकीकत में यह किसानों के लिए फायदेमंद है। इसमें बागवानों और कंपनियों के बीच अपनी उपज का पक्का बाजार और दाम की गारंटी मिलेगी। फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
आर्गेनिक फार्मिंग में बड़ी संभावना
देश और विदेशों में आर्गेनिक उत्पादों की एक नई मार्केट तैयार हो गई है। सामान्य के मुकाबले आर्गेनिक सेब के लिए लोग ऊंची कीमत देने को तैयार हैं। सरकार की ओर से मान्यताप्राप्त लैब की सर्टिफिकेशन के बाद बारकोडिंग कर बागवान अपने आर्गेनिक सेब के ऊंचे दाम प्राप्त कर सकते हैं।
पहाड़ों की चुनौतियां अलग : संजय
डॉ. संजय कुमार सिंह ने बताया कि किसानों के लिए योजनाएं मैदानी क्षेत्रों के हिसाब से बनती हैं, जबकि पहाड़ों की चुनौतियां अलग हैं। नीति निर्माताओं को पहाड़ों की जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बनानी होंगी और मैदानों के मुकाबले अधिक बजट का प्रावधान करना पड़ेगा।