वन विभाग में पीसीसीएफ (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) के पद को लेकर कैट में चल रही सुनवाई के बीच अब प्रदेश के मुख्य सचिव पद भी विवादों में आ गया है। दो वरिष्ठ आईएएस अफसरों ने मुख्य सचिव वीसी फारका की नियुक्ति को चुनौती दे दी है। दोनों ने कैट में नियुक्ति को अवैध बताया है।
उन्होंने खुद को ऐसे पद पर तैनात करने की भी मांग की है, जहां मुख्य सचिव को उन्हें रिपोर्ट न करना पड़े। दरअसल, मुख्य सचिव पद से पी मित्रा के रिटायर होने के बाद वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर दीपक सानन का नाम था। सानन के बाद से विनीत चौधरी और फिर उपमा चौधरी आती थीं, लेकिन सरकार ने वरिष्ठता सूची को अनदेखा करते हुए वीसी फारका को इस पद पर नियुक्त कर दिया।
इसके बाद नियुक्ति का विरोध जताते हुए तीनों अफसर लंबी छुट्टी पर चले गए। इस बीच उपमा चौधरी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चली गईं। दोनों को न तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति मिली, न प्रदेश सरकार उन्हें बुलाने पर विचार कर रही थी। ऐसे में दोनों ही वरिष्ठ अफसर कैट पहुंच गए। दोनों की दलील थी कि मुख्य सचिव पद पर हुई फारका की नियुक्ति नियमानुसार नहीं है।
नियुक्ति से पहले सर्विस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। साथ ही मुख्य सचिव पद पर नियुक्ति को लेकर भारत सरकार के आदेशों की अनुपालना भी नहीं की गई। दोनों अफसरों ने यह भी कहा है कि जब तक मामले में सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक सरकार उन्हें ऐसे पदों पर रखें, जहां उन्हें मुख्य सचिव को रिपोर्ट न करना पड़े।