तिब्बत समुदाय के लोग दे रहे सांकेतिक अनशन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के चौड़ा मैदान में तिब्बती समुदाय के लोगों ने अमेरिका में तिब्बती कार्यकर्ता लोबसांग पाल्डन के आत्मदाह के बाद 24 घंटे का सांकेतिक अनशन शुरू किया है।
अनशन के माध्यम से तिब्बती भाषा, संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और विशिष्ट पहचान के संरक्षण की मांग को लेकर समुदाय ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। रीजनल तिब्बतन वुमन एसोसिएशन और रीजनल तिब्बतन कम्युनिटी शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अनशन में 50 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने बाल मुंडवाकर प्रतीकात्मक विरोध भी जताया। इस दौरान तिब्बत महिला मंडल की प्रतिनिधि कालसांग यांचिन ने कहा कि चीन में तिब्बती समुदाय की संस्कृति को खत्म करने के प्रयासों के विरोध में वह प्रदर्शन कर रहे हैं। चीन में एक देश, एक भाषा कानून बनाया है।
उन्होंने कहा कि अभी 24 घंटे की भूख हड़ताल की जा रही है, लेकिन इसे आगे भी जारी रखा जा सकता है। वहीं तेंजिन सुबोरम ने कहा कि शनिवार को दोपहर 3:00 बजे समुदाय के वरिष्ठ लोग मुंडन करवाकर विरोध जताएंगे। समाजसेवी एवं भाजपा नेता कर्ण नंदा ने कहा कि भारत और तिब्बती समुदाय का संबंध केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों से भी जुड़ा है। किसी भी समुदाय की भाषा, संस्कृति, धर्म और पहचान उसकी महत्वपूर्ण विरासत होती है और उसका संरक्षण जरूरी है। उन्होंने लोबगा रंगजेन की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शांति की कामना की।