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शादी के नाम पर देवभूमि के इस जिले से हो रही है बेटियों की तस्करी

Mon, 21 Nov 2016 10:31 PM IST
अशोक केडियाल/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल के जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र में बरसों से पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश में शादी के नाम पर बेटियों की तस्करी का गोरखधंधा जारी है। मात्र चंद रुपयों, गरीबी और अशिक्षा के चलते यहां की बेटियों को बाहरी राज्यों में अधेड़, तलाकशुदा और अक्षम व्यक्तियों के हवाले कर दिया जाता है।
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प्रताड़ना और पैसों के दबाव के कारण बेटियां न तो पुलिस में शिकायत कर पाती हैं न ही परिवार के सामने मुंह खोल पाती हैं। कई लड़कियों को तो आगे किसी और को बेचने के मामले सामने आए हैं। शादी के बाद अधिकतर बेटियां कभी मायके लौट नहीं पाती हैं। जो प्रताडि़त होकर लौटती हैं वे वापस ससुराल नहीं जातीं। 

प्रदेश सरकार की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

प्रदेश सरकार की ओर अधिकृत एकीकृत बाल विकास परियोजना की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में पिछले ढाई दशक के मामलों को उजागर किया गया है। इस क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में पुलिस के पास मानव तस्करी के दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। अभिभावकों की ओर से शिकायत न करने से अधिकतर आरोपी छूट जाते हैं। 

एसडीएम शिलाई विकास शुक्ला ने माना कि शादी के नाम पर लड़कियों की तस्करी हो रही है। अब बाहरी राज्यों में शादी करने वाली लड़कियों की वेरिफिकेशन करेंगे। मानव तस्करी के कुछ मामले सामने आए हैं जिन पर गंभीरता से जांच जारी है।

हरियाणा में कम लिंग अनुपात बड़ा कारण

हरियाणा राज्य में देश में सबसे कम लिंग अनुपात है। ऐसे में मानसिक, शारीरिक रूप से अक्षम बेटों की शादी के लिए वे पिछड़े जिले सिरमौर का रुख करते हैं। यहां बिचौलिए पैसों का लालच देकर गरीब, अशिक्षित एवं निम्न सामाजिक जीवन स्तर वाले सैकड़ों परिवारों

की बेटियों के शादी के नाम पर सौदे करते हैं। हरियाणा और यूपी के सहारनपुर आदि क्षेत्रों में बेची गईं दर्जनों युवतियां वहां प्रताडि़त होने के साथ नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। जिले में कई ऐसी शादियां हुईं हैं जिसका कहीं कोई रिकार्ड नहीं है।
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पुलिस ने शिलाई की लड़की झंडूता से छुड़वाई

शिलाई क्षेत्र के जरवा गांव की एक लड़की को जबरन कथित शादी के लिए बिलासपुर के झंडूता तहसील ले जाया गया था। पुलिस ने शिकायत के बाद मामला दर्ज कर युवती को झंडूता जाकर छुड़वाया। इससे पहले पांवटा में एक युवती का सौदा करते हुए दलालों एवं परिजनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 

एसडीएम ने गठित की पंचायत स्तरीय टास्क फोर्स
स्थानीय प्रशासन पिछले छह माह से मानव तस्करी से संबंधित केसों की स्टडी कर रहा है। एकीकृत बाल विकास परियोजना की रिपोर्ट के बाद एसडीएम शिलाई विकास शुक्ला ने पंचायत स्तरीय टास्क फोर्स गठित की है।

इसमें तहसीलदार, सीडीपीओ, बीएमओ, बीडीओ, एसएचओ, टीडब्ल्यूओ एवं बीडीसी के चेयरमैन शामिल हैं। टास्क फोर्स पंचायत से लड़की की बाहरी राज्यों में शादी होने का पूरा रिकार्ड खंगालेगी, ताकि मानव तस्करी और बेटी बेचने जैसे मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।
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