एचआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल के चलते वीरवार को राजधानी सहित पूरे जिला शिमला में निगम की बसों की आवाजाही ठप है। प्राइवेट बसें चलती रहीं लेकिन इनमें तिल धरने की जगह नहीं मिली।
हड़ताल के चलते वीरवार को जिला शिमला में 450 रूटों पर एचआरटीसी की बसें रवाना नहीं हुई। अकेले राजधानी शिमला में ही एचआरटीसी के 172 रूट फेल हुए। निगम की स्कूल बसें न चलने से छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
निगम कर्मचारियों की हड़ताल का वीरवार को व्यापक असर देखने को मिला। शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बसें न चलने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। विशेष रूप से ऐसे रूटों पर जहां सिर्फ एचआरटीसी की बसें चलती हैं दूसरा विकल्प न होने से लोगों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ी।
राजधानी शिमला में वीरवार सुबह से बसों की आवाजाही रोक दी गई। ओल्ड बस स्टैंड और टुटीकंडी आईएसबीटी के एंट्री और ऐग्जिट प्वाइंट आड़ी तिरछी बसें लगा कर रोक दिए गए। एचआरटीसी बसें न चलने पर प्राइवेट बस आपरेटरों ने मोर्चा संभाला। लोकल रूटों पर ओल्ड बस स्टैंड के बाहर से और लांग रूट पर आईएसबीटी के बाहर से बसों का संचालन किया गया।
परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक के खिलाफ फूटा कर्मचारियों का गुस्सा
केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक के खिलाफ वीरवार को एचआरटीसी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति और सीटू नेताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
ओल्ड बस स्टैंड में प्रदर्शन के दौरान जेसीसी और सीटू के नेताओं ने विधेयक को संसद में पास न होने देने का ऐलान किया। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के महासचिव खेमेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार सार्वजनिक परिवहन का बाजारीकरण कर इसे निजी हाथों में सौंपने जा रही है।
विधेयक यदि कानून का रूप लेता है तो देश के राज्य परिवहन उपक्रमों की समाप्ति का क्रम शुरू हो जाएगा। सीटू के प्रदेश महासचिव डा. कश्मीर सिंह ठाकुर ने कहा कि परिवहन निगमों को पूंजीपतियों के हवाले करने के मकसद से यह विधेयक लाया जा रहा है।
यदि विधेयक पास हो जाता है तो देश के करीब साढ़े सात लाख कर्मचारी नौकरी से बाहर कर किए जाएंगे। सीटू के कार्यकर्त्ताओं ने केंद्र सरकार को जम कर कोसा। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। पुलिस अधिकारियों के अलावा क्यूआरटी भी मौके पर मौजूद रही।
हरदयाल सिंह, युद्धराज मेहता, विद्यासागर, हरी लाल, शंकर सिंह, जीतराम चौधरी, सुभाष चंद, गोपाल लाल, अजय कुमार, रोशन चौहान, सत्या चौहान, विजेंद्र मेहरा, किशोरी ढटवालिया, विवेक कश्यप, रमाकांत मिश्रा, विकास राणा, महेंद्र कुमार, विनोद और राजेंद्र शर्मा ने कर्मचारियों को संबोधित किया।