एचआरटीसी के चालक और परिचालक यूनियन।
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नाइट ओवर टाइम और अन्य भत्तों का भुगतान न किए जाने पर पथ परिवहन निगम चालक यूनियन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब निगम के चालक और परिचालक एक अगस्त से आठ घंटे ही सेवाएं देंगे। जहां ड्यूटी के आठ घंटे पूरे हो जाएंगे। चालक और परिचालक बस से उतर जाएंगे। प्रदेश चालक यूनियन का कहना है कि अब आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यूनियन की सभी मांगे माननी होंगी। ऐसा न करने पर चालक-परिचालक नियमों में ही सेवाएं देंगे। उधर, एचआरटीसी कर्मचारियों की चेतावनी के बाद निगम प्रबंधन निपुण जिंदल ने बुधवार को दोपहर तीन बजे यूनियन के पदाधिकारियों को बैठक के लिए बुला दिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों का हल निकाला जाएगा।
एचआरटीसी चालक यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा कि निगम प्रबंधन और सरकार को 31 जुलाई तक उनकी मांगों को पूरे करने का समय दिया गया है। यूनियन के पदाधिकारियों ने सरकार को पहले ही 11 जुलाई को भी अल्टीमेटम दिया था। उस पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मान सिंह ने कहा कि बीते पांच साल का करीब 100 करोड़ रुपये का ओवरटाइम भुगतान लंबित है। कर्मचारियों को मिलने वाला करोड़ों रुपये का चिकित्सा भत्ता भी काफी समय से अटका हुआ है।
सरकार ने एचआरटीसी कर्मचारियों और पेंशनरों को एक तारीख तक तनख्वाह और पेंशन देने का आश्वासन दिया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। शेंशनरों को अभी भी पेंशन नहीं मिली है। निगम प्रबंधन पर कर्मचारियों की 200 करोड़ रुपये की देनदारियां बकाया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर 23 जुलाई को निगम प्रबंधन के साथ होने वाली बैठक में भी कोई समाधान नहीं निकला तो कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। यूनियन ने दो टूक कहा कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा। जब तक सभी लंबित भुगतान नहीं किए जाते, कर्मचारी सिर्फ आठ घंटे की ड्यूटी करेंगे। एचआरटीसी कार्यालय के बाहर गेट मीटिंग जारी रहेगी।
परिचालक यूनियन ने किया समर्थन
एचआरटीसी परिचालक यूनियन ने चालक यूनियन के फैसले का समर्थन किया है। यूनियन के प्रदेेशाध्यक्ष प्रीत महेंद्र ने कहा कि चालक यूनियन ने जो फैसला लिया है। वह कर्मचारी हित में है। परिचालक यूनियन चालकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।