एचआरटीसी की स्थापना के 50 साल का जश्न मनाने के दूसरे ही दिन परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने एचआरटीसी प्रबंधन और प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में बैठक हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि आश्वासन के बावजूद 1500 करोड़ की देनदारियां न चुका कर निगम प्रबंधन और सरकार ने एचआरटीसी कर्मियों के साथ धोखा किया है। समिति के महासचिव खेमेंद्र गुप्ता ने बताया कि 55 महीनों का नाइट ओवर टाइम, नए वेतनमान का एरियर, पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, लीव इंकैशमेंट, जीपीएफ, मेडिकल प्रतिपूर्ति सहित विभिन्न एरियर के एवज में करीब 1500 करोड़ रुपये की वित्तीय देनदारियां लंबित हैं। इस अवसर पर समन्वय समिति ने निर्णय लिया है कि लंबित मांगों को मनवाने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत परिवहन कर्मचारी 14 अक्तूबर से प्रत्येक यूनिट में प्रतिदिन गेट मीटिंग करेंगे और 16 अक्तूबर को निगम मुख्यालय शिमला पर धरना प्रदर्शन कर घेराव किया जाएगा।
निगम प्रबंधन नहीं मान रहा मांगें
मान सिंह ठाकुर ने कहा कि निगम प्रबंधन संयुक्त समन्वय समिति के साथ बैठकें तो करता है लेकिन जब मांगें पूरी करने की बात आती है तो टालमटोल की जाती है। लगातार हो रही वादा खिलाफी से कर्मचारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वित्तीय मांगों के अलावा एचआरटीसी को रोडवेज का दर्जा देना, भ्रष्टाचारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, पीस मील कर्मचारियों को एकमुश्त अनुबंध पर लाना, परिचालकों की वेतन विसंगतियां दूर करना, रिक्त पद भरना, पेंशन के लिए सरकार के बजट में प्रावधान करना, निजी रूट परमिट देने पर रोक सहित अन्य मांगों पर विचार नहीं किया जा रहा है। इससे निगम कर्मियों में रोष व्याप्त है।