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देश के सबसे लंबे रूट पर दौड़ी सरकारी बस, लिम्का बुक में दर्ज है रिकॉर्ड

Thu, 08 Jun 2017 01:47 PM IST
दिनेश जस्पा/अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
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बस को हरी झंडी दिखाकर लेह के लिए रवाना करते एसडीएम केलांग सन्नी शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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देश के सबसे लंबे रूट पर एचआरटीसी बस चलनी शुरू हो गई है। दिल्ली-मनाली-लेह रूट पर आठ माह बाद बस सेवा शुरू हो रही है। एसडीएम केलांग सन्नी शर्मा ने सुबह पांच बजे केलांग बस अड्डे से बस को हरी झंडी दिखाकर लेह के लिए रवाना किया।
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देश के सबसे लंबे 1245 किलोमीटर रूट दिल्ली-लेह मार्ग पर बस शुरू होने की खबर सुनते ही पर्यटकों में खुशी की लहर है। इसमें दिल्ली से लेह तक का किराया 1380 रुपये है। 

इससे सेना को भी राहत मिलेगी। बस जिंगजिंग बार, बारालाचा, हिमाचल सीमा सरचू होते से हुए लेह पहुंचेगी। एचआरटीसी केलांग डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक मंगल चंद मनेपा ने कहा कि दिल्ली-लेह के बीच बस सेवा आरंभ कर दी गई है। सुबह एसडीएम केलांग ने बस को हरी झंडी दिखाई।
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लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है यह सेवा

बीते वर्ष दिल्ली-लेह बस सेवा सितंबर में बंद हो गई थी। आठ माह बाद केलांग डिपो की बस इस रूट पर शुरू हुई। इसी डिपो की बदौलत एशिया के सबसे ऊंचे गांव किब्बर और 1245 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मनाली-लेह रूट पर बस सुविधा देकर एचआरटीसी का

नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। अब देश-विदेश के पर्यटक 13050 फीट ऊंचे रोहतांग दर्रे को पार करने के बाद 16400 फीट ऊंचे बारालाचा ला पास, 17582 फीट ऊंचे तांगलांग ला दर्रे से होते हुए बर्फ की दीवारों के बीच लेह के सुहाने सफर का आनंद उठा सकेंगे। 

कारगिल युद्ध से सामने आया सामरिक महत्व
भारतीय सैनिकों को कम समय में इसी रास्ते से रसद और असलहा पहुंचाया सकेगा। 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद से इस मार्ग को सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र सहित अन्य अग्रिम इलाकों की निगहबानी के लिए यह मार्ग खासा महत्वपूर्ण माना जाता है।
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