शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के फॉरेंसिक साइंस विभाग में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक फॉरेंसिक शिक्षा को जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू की है। शिक्षा मंत्रालय के इंडियन नॉलेज सिस्टम (आईकेएस) डिवीजन की ओर से विवि में एक विशेष शोध परियोजना को स्वीकृति मिली है जिसके तहत चरक संहिता में वर्णित प्राचीन भारतीय विषविज्ञान का अध्ययन किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य प्राचीन भारतीय चिकित्सा चरक संहिता और विषविज्ञान संबंधी ज्ञान को वर्तमान फॉरेंसिक शिक्षा से जोड़ना है ताकि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भारतीय पारंपरिक ज्ञान की वैज्ञानिक समझ मिल सके। परियोजना का संचालन फॉरेंसिक साइंस विभाग की डॉ. दीपिका भंडारी के निर्देशन में किया जाएगा। इसके लिए विभाग में रिसर्च इंटर्नशिप कार्यक्रम भी शुरू किया है जिसमें परियोजना से संबंधित विषयों में मास्टर डिग्री कर रहे विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। चयनित अभ्यर्थियों को छह माह तक शोध कार्य से जोड़ा जाएगा और उन्हें प्रतिमाह मानदेय भी प्रदान किया जाएगा। इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया 16 मई तक चलेगी जबकि साक्षात्कार 18 मई को हाइब्रिड मोड में आयोजित किए जाएंगे। परियोजना का संचालन फॉरेंसिक साइंस विभाग की डॉ. दीपिका भंडारी के निर्देशन में किया जाएगा। इसके लिए विभाग में रिसर्च इंटर्नशिप कार्यक्रम भी शुरू किया है जिसमें परियोजना से संबंधित विषयों में मास्टर डिग्री कर रहे विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। चयनित अभ्यर्थियों को छह माह तक शोध कार्य से जोड़ा जाएगा और उन्हें प्रतिमाह मानदेय भी प्रदान किया जाएगा। इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया 16 मई तक चलेगी जबकि साक्षात्कार 18 मई को हाइब्रिड मोड में आयोजित किए जाएंगे।