विवि के रामानुजन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भारतीय गणित केंद्र को देशज आहार के लिए शोध परियोजना मंजूर
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आयुष आधारित पारंपरिक आहार पर होगा अध्ययन खास खबर संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला का रामानुजन भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं भारतीय गणित केंद्र देशज आहार पर शोध करेगा।
यह शोध परियोजना भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) प्रभाग, शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित होगी। इसमें लाहौल-स्पीति और किन्नौर की जनजातीय समुदायों में प्रचलित देशज आहार का आयुष आधारित वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। साथ ही इन पारंपरिक खाद्य प्रणालियों की पोषणीय क्षमता और स्वास्थ्य संबंधी उपयोगिता का अध्ययन होगा। परियोजना का शीर्षक परंपरा से व्यवहार तक : हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और किन्नौर की जनजातीय समुदायों में देशज आहार तथा उसकी पोषणीय क्षमता का आयुष आधारित आकलन रखा है। यह परियोजना भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रतिस्पर्धी अनुसंधान प्रस्ताव कार्यक्रम 2026-27 में स्वीकृत हुई है। परियोजना के प्रधान अन्वेषक रामानुजन केंद्र के निदेशक प्रो. जोगिंदर सिंह धीमान हैं। यह अनुसंधान दो वर्ष तक चलेगा। अध्ययन के दौरान शोधकर्ता जनजातीय क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय भोजन, पारंपरिक खाद्य पदार्थों, उनकी तैयारी की विधियों और उनके स्वास्थ्य संबंधी महत्व का डेटा तैयार करेंगे। इसके साथ ही देशज आहार की पोषणीय गुणवत्ता और आयुष पद्धति के दृष्टिकोण से उसकी उपयोगिता का विश्लेषण किया जाएगा। शोध का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार पर परखना और उसे वर्तमान पोषण संबंधी आवश्यकताओं से जोड़ना है।
सहायकों और अन्वेषकों की होगी नियुक्ति
परियोजना के लिए दो शोध सहायक और दो क्षेत्रीय अन्वेषकों की नियुक्ति की जाएगी। चयनित अभ्यर्थी जनजातीय क्षेत्रों में सर्वेक्षण, आंकड़ा संग्रह, सांख्यिकीय विश्लेषण, कोडिंग और शोध संबंधी अन्य कार्य करेंगे। चयनित अभ्यर्थियों को कार्य दिवसों के आधार पर मानदेय दिया जाएगा। परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ जोगिंदर धीमान के अनुसार परियोजना का उद्देश्य हिमाचल की पारंपरिक खाद्य विरासत का वैज्ञानिक अध्ययन कर उसे भारतीय ज्ञान प्रणाली और जनस्वास्थ्य से जोड़ना है।