तीसरे बड़े फैसले में पीएचडी करने वाले छात्रों को अब पीएचडी कोर्स वर्क की तीन परीक्षाएं देनी होंगी। इनमें रिसर्च मेथेडोलॉजी, सब्जेक्ट स्पेशिलाइजेशन की परीक्षा के अलावा तीसरी रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स सभी को देनी अनिवार्य होगी। यूजीसी के पीएचडी के नए रैगुलेशन के तहत इस परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है। विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने बताया कि एकेडमिक काउंसिल की बैठक में तीनों प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। अब इसे विवि की कार्यकारिणी परिषद से मंजूरी दिलवाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी बाद इसे तुरंत लागू किया जाएगा। बैठक में विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल, डीन प्लांनिंग प्रो. जोगिंद्र सिंह धीमान, अधिष्ठाता छात्र कल्या प्रो. ममता मोक्टा आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. रमेश ठाकुर, प्रो. संदीप चौहान, प्रो. नयनजीत सिंह नेगी, प्रो. संजय सिंधु सहित अन्य डीन ऑफ लाइन और ऑनलाइन जुड़े थे।
यूजी में एनईपी लागू करने पर चर्चा
यूजी डिग्री कोर्स में एनईपी-2020 लागू करने को लेकर अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम की अध्यक्षता में विवि में बैठक हुई। बैठक में यूजी डिग्री के पाठ्यक्रम और एनईपी से यूजी डिग्री कोर्स में किए जाने वाले बदलाव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में डीएस ने सभी संबंधित अधिकारियों और अधिष्ठाताओं को अब तक की तैयारियों से अवगत करवाया और विवि के स्तर पर नीति के लिए जो भी व्यवस्था की जानी है, उसे करने को कहा। एनईपी को लागू करने को लेकर हालांकि अभी सीधे तौर पर सरकार की ओर से आदेश या संकेत नहीं मिले हैं, इसके बावजूद विवि के स्तर पर एनईपी के लिए बनी कमेटी के सदस्यों के साथ ऑनलाइन मोड से समीक्षा बैठक आयोजित की गई।