हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रणाली को लेकर लागू किया गया ऑनलाइन सिस्टम शुरू से ही छात्रों के लिए सिरदर्द बना रहा है। पीजी कोर्स में 2021-22 में किया गया उत्तर पुस्तिकाओं का ऑन स्क्रीन मूल्यांकन का प्रयोग असफल रहा था। जिसे पूर्व कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार के कार्यकाल में किया था। इसमें भी खामियां रही थीं। विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम लटक गए थे। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने इसे यूजी कोर्स प्रथम वर्ष में लागू किया।
अब इसका खामियाजा छात्रों को आधे अधूरे घोषित परीक्षा परिणाम के रूप में भुगतना पड़ रहा है। यूजी के बीएससी और बीकॉम के घोषित परिणाम के 20 और 33 फीसदी रहने पर अपने आप में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विवि की ओर से अपनाए गए ऑन स्क्रीन मूल्यांकन भी छात्रों के आधे अधूरे परीक्षा परिणाम का संभावित कारण हो सकता है। यूजी डिग्री कोर्स के ऑनस्क्रीन मूल्यांकन की प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग करने से लेकर इसे शिक्षकों को ऑनलाइन ही शिक्षकों को मूल्यांकन के लिए भेजे जाने तक की पूरी प्रक्रिया ईआरपी प्रोजेक्ट की कंपनी के कर्मी ही करते रहे हैं।
इसका पहला प्रयोग 2021-22 में पीजी के कुछ कोर्स से किया था जो असफल रहा था। बाद में पुराने तरीके से मूल्यांकन कर रिजल्ट तैयार करने पड़े थे। पूरी प्रक्रिया ईआरपी कंपनी से ठेके पर ही करवाई जाती है। ऐसे में स्कैनिंग में या इसे शिक्षकों तक पहुंचाने, शिक्षकों के इन उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, अवार्ड आने तक की पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर खामी रहने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
यह कोई नया मामला नहीं है। विश्वविद्यालय में जब से एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) विवि को ऑनलाइन करने का प्रोजेक्ट चल रहा है, तब से करोड़ों खर्च हो जाने के बावजूद विवि के यूजी और पीजी छात्रों को इससे सुविधा कम, असुविधा और परेशानी ही अधिक हुई है। छात्र संगठनों ने शुरू से ही ईआरपी सिस्टम की खामियों का विरोध किया है। विवि की ओर से अपनाए ऑन स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया का छात्र संगठनों के साथ, विवि के कर्मचारी, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले शिक्षक भी विरोध करते रहे हैं।