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अलाइड सर्विस परीक्षा के टॉपर्स की कहानी, उन्ही की जुबानी

Mon, 04 Jul 2016 02:17 PM IST
अरविंद ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
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हितेश ने अलाइड सर्विस परीक्षा में एक्साइज एंड टैक्सेशन इंस्पेक्टर के लिए पहला स्थान पाया है। - फोटो : अमर उजाला
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कहते हैं हौसला बुलंद हो तो मंजिल कदम चूम ही लेती है। चुनौतियों के सामने कई बार हौसला डगमगाया भी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मंडी जिले के हितेश और पुष्पराज तथा बिलासपुर जिले के विकास ने। तीनों ने मेहनत और हिम्मत के बूते कामयाबी की ऊंची उड़ान भरी है।
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वे प्रदेश के युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बने हैं। हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की 2015 की अलाइड सर्विस परीक्षा पास करने वाले पहले तीन टॉपर टीचर हैं। इनमें दो जेबीटी और तीसरे एक निजी विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। तीनों का सपना एचएएस बनना है।

37 साल की उम्र में टॉपर बने हितेश
हितेश ने 37 साल की उम्र में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की 2015 की अलाइड सर्विस परीक्षा में एक्साइज एंड टैक्सेशन इंस्पेक्टर के लिए पहला स्थान पाया है। वह सितंबर 2015 तक कफलोग प्राथमिक स्कूल में जेबीटी तैनात थे। इसके बाद एसएसए के तहत ब्लॉक रिसोर्स सेंटर कोऑर्डिनेटर (बीआरसीसी) के लिए नियुक्त हुए।
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हितेश का अलाइड सर्विस के लिए दूसरा प्रयास था। पहली बार 2014 में यह परीक्षा दी थी। रजवाड़ी हाई स्कूल से मैट्रिक की। सुदंरनगर से 12वीं और एचपीयू से पत्राचार के माध्यम से स्नातक की डिग्री ली। जून 1999 में जेबीटी के तौर पर नियुक्त हुए।

वह 2 से 3 घंटे पढ़ाई करते थे। वह एचएएस बनना चाहते हैं। हितेश ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं हैं। बस जरूरत है खुद को परखने की। युवा लगन से अपने लक्ष्य पर टिके रहें, सफलता जरूर मिलेगी।

पुष्प राज ने हासिल किया दूसरा स्थान

पुष्प राज - फोटो : अमर उजाला
मंडी के छपराहन निवासी पुष्पराज (27) ने अलाइड सर्विस परीक्षा में एक्साइज एंड टैक्सेशन इंस्पेक्टर के लिए दूसरा स्थान पाया है। उन्होंने डीएवी गोहर से शुरुआती शिक्षा हासिल की। इसके बाद वल्लभ कॉलेज से स्नातक और बाद में सुंदरनगर से केमिस्ट्री में एमएससी की डिग्री ली। पुष्पराज ने दूसरे प्रयास में परीक्षा पास की। पहले प्रयास में इंटरव्यू में बाहर हो गए थे।

वर्तमान में दूरदराज क्षेत्र स्थित धनशाल प्राथमिक विद्यालय में जेबीटी हैं। कहते हैं कि स्कूल तक पहुंचने को एक घंटा पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद भी 5 से 6 घंटे हर रोज पढ़ाई की। पिता गिरधारी लाल फिशरीज विभाग में असिस्टेंट के पद पर हैं। माता हंसा ठाकुर गृहिणी हैं। पुष्पराज ने बताया कि वह एचएएस बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि रूटीन स्टडी के बिना परीक्षा पास नहीं की जा सकती। युवा कोचिंग की बजाय सेल्फ स्टडी पर फोकस करें।
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विकास भारती ने पहले प्रयास में पास की परीक्षा

विकास भारती - फोटो : अमर उजाला
बिलासपुर के हरितलयांगर के विकास भारती (31) ने तीसरा स्थान पाया है। इनकी शुरुआती शिक्षा डंगार स्कूल से हुई। 2002 में +2 की बोर्ड परीक्षा में साइंस संकाय से प्रदेश में पांचवें स्थान पर रहे। सुंदरनगर से ग्रेजुएशन के बाद 2008 में एचपीयू से केमिस्ट्री में एमएससी की।

2008 में नेट पास किया। 2012 में पीएचडी की। बाद में ओएनजीसी में बतौर असिस्टेंट तैनात हुए। बताया कि ओएनजीसी में नौकरी के दौरान लगातार 14 दिन समंदर में रहना पड़ता था। नौकरी का शेडयूल बेहद मुश्किल था। इसलिए इस्तीफा दे दिया।

2015 से पालमपुर में एक निजी विवि में केमिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर तैनात हैं। विकास ने पहले प्रयास में परीक्षा पास की है। वह 2 से 3 घंटे पढ़ाई करते थे। पिता कर्मचंद पट्टा मिडल स्कूल में ड्राइंग टीचर हैं। माता शीला देवी गृहिणी हैं। वह एचएएस बनना चाहते हैं। युवाओं से कहा कि वे कड़ी मेहनत करें और खुद पर भरोसा रखें।
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