राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने बोर्ड प्रबंधन पर भारतीय मजदूर संघ से संबंधित यूनियन के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। बुधवार को शिमला में यूनियन ने प्रेस कांफ्रेंस कर मुख्यमंत्री कार्यालय की शह पर भारतीय मजदूर संघ के नेताओं पर प्रबंधन को धमकाने का आरोप लगाया। प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि बोर्ड प्रबंधन को वार्ता के लिए बुलाने को एक माह का नोटिस दिया गया है। अगर एक माह के भीतर बैठक के लिए नहीं बुलाया गया पूरे प्रदेश में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे।
अध्यक्ष ने कहा कि साल 1971 से उनकी यूनियन बिजली बोर्ड के विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों से संबंधित मांगें उठाती आई है। साल 1971 से 2017 तक यूनियन और प्रबंधन के बीच नियमित तौर पर बैठके होती रही हैं, लेकिन जब से प्रदेश में भाजपा की नई सरकार बनी है तब से बोर्ड प्रबंधन ने यूनियन की अनदेखी करना शुरू कर दिया है। जब प्रबंधन से इस बाबत पूछा गया तो पता चला कि सरकार के दबाव के चलते ऐसा हुआ है।
खरवाड़ा ने बताया कि भारतीय मजदूर संघ से संबंधित तकनीकी कर्मचारी यूनियन के दबाव में सरकार ने बोर्ड प्रबंधन को उनकी यूनियन से बात नहीं करने को कहा है। बोर्ड कार्यालय को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। उनकी यूनियन किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ी हुई नहीं है। कर्मचारी हित में ही यूनियन का लोकतांत्रिक तरीके से गठन हुआ है।
उनकी यूनियन के पदाधिकारियों को स्थानांतरित कर प्रताड़ित किया जा रहा है। कहा कि इस स्थिति अब केवल संघर्ष की राह ही बची है। इसी कड़ी में बोर्ड प्रबंधन को नोटिस देकर बैठक के लिए बुलाने को कहा है। खरवाड़ा ने बोर्ड में रिक्त चल रहे विभिन्न पदों को भी सरकार से भरने की मांग की है।