साल 2009 से 2013 तक राज्य लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष रहे चंद्र मोहन शर्मा पत्नी के साथ जाखू स्थित घर ग्रेस कॉटेज में रह रहे थे। पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार सुबह वह घर से अचानक कहीं चले गए। उन्होंने अपने बेडरूम में पांच पन्नों का एक नोट लिख रखा था।
नोट में बीमारी के बारे में विस्तार से लिखा है। वह करीब एक साल से कान की बीमारी से परेशान थे। नोट पढ़कर पत्नी ने तुरंत रिश्तेदारों को इसकी सूचना दी। पुलिस को सुबह करीब आठ बजे इस बारे में बताया गया।
तलाश के दौरान करीब दस बजे घर के बेसमेंट में उनका शव बरामद किया गया। मौके पर पुलिस ने खुदकुशी के लिए इस्तेमाल की गई पिस्टल भी बरामद कर ली है। घटना बेसमेंट में होने के चलते गोली की आवाज किसी ने भी नहीं सुनी। पिस्टल के लाइसेंस को लेकर जांच की जा रही है।
सूचना मिलने के बाद शिमला के एसपी ओमापति जमवाल, डीएसपी प्रमोद शुक्ला और सेना के अधिकारी मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य उठाए। पूरी कार्रवाई होने के बाद करीब साढ़े तीन बजे शव पोस्टमार्टम के लिए आईजीएमसी भेज दिया।
डीएसपी प्रमोद शुक्ला ने बताया कि सूसाइड नोट और प्रारंभिक जांच के अनुसार चंद्र मोहन शर्मा कुछ समय से अस्वस्थ थे, जिससे वे परेशान थे। इसी परेशानी के कारण उन्होंने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली।
रिटायर्ड मेजर जनरल चंद्र मोहन शर्मा ने सूसाइड नोट में लिखा है कि ‘अब बीमारी बर्दाश्त से बाहर हो गई है। मैं जा रहा हूं। कड़ी मेहनत से जो संपत्ति अर्जित की है इसे संभालना।’