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HP Politics: शांता कुमार बोले- सरकार के राजनीतिक फैसले गलत, आर्थिक संकट में भी बना दिया बड़ा बोर्ड

Tue, 10 Feb 2026 07:37 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, पालमपुर (कांगड़ा)।

सार

राजनीति में निहित स्वार्थ और सरकार गलत निर्णय करती जा रही है। आज का हिमाचल का आर्थिक संकट गलत योजना, फिजूलखर्ची, भारी भरकम प्रशासन और बचत का बिल्कुल न होना है।
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भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने सरकार के राजनीतिक फैसलों को गलत कहा है। उन्होंने कहा कि छोटा सा हिमाचल समझदारी से चलता है। राजनीति में निहित स्वार्थ और सरकार गलत निर्णय करती जा रही है। आज का हिमाचल का आर्थिक संकट गलत योजना, फिजूलखर्ची, भारी भरकम प्रशासन और बचत का बिल्कुल न होना है। सबसे बड़ा उदाहरण है इतने भयंकर संकट में सरकार ने ब्राह्मण समुदाय का बोर्ड बनाया और उसमें छोटे से हिमाचल में 300 सदस्यों को नामित किया। आर्थिक संकट के समय इस प्रकार का अनावश्यक बोर्ड बनाना एक बहुत बड़ी राजनीतिक गलती है।

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उन्होंने कहा कि जब उन्हें प्रदेश की सरकार को चलाने की जिम्मेवारी मिली थी तो सरकार को सरलता से फिजूलखर्ची से बचाने की कोशिश की। हालांकि उस समय ऐसा आर्थिक संकट नहीं था तो भी उन्हें लगा अगर प्रदेश में पानी देना है और मूलभूत सुविधाएं देनी हैं, तो बचत करनी पड़ेगी। उन्होंने यह बचत अपने कार्यालय से शुरु की। कई फैसलों से फिजूल खर्ची रोका गया था। इस किस्म की बहुत सी बातों को सोच कर बचत की ओर हर घर पानी पहुंचाया। मंत्रिमंडल छोटा था, चेयरमैन अधिक नहीं बनाए। शांता ने कहा कि सरकार की आय बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाए। भारत सरकार से इतिहास में पहली बार पन बिजली परियोजनाओं में रायॅल्टी का सिद्धांत मनवाया। लाखों रुपये की आय होनी लगी।
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शांता कुमार ने का कि कई फोन कटवा दिए गए थे। प्रदेश के अधिकारियों की फोनों की संख्या आधी रह गई थी। सबसे बड़ी फिजूलखर्ची गाड़ियों के दुरुपयोग से होती थी। गाड़ियों का काफिला चलता था और सरकारी अधिकारी गाड़ियों का दुरुपयोग करते थे। गंगा सिंह की अध्यक्षता में एक बचत कमेटी बनाई थी। सरकारी अधिकारी घूमने के लिए शनिवार को कार्यक्रम बनाते थे और परिवार सहित रविवार को मौज मस्ती होती थी। तब आदेश दिया कि सरकार की हर गाड़ी शुक्रवार शाम अपने केंद्र पर आ जाएगी और शनिवार, रविवार और सोमवार को बिना अनुमति के कोई सरकारी गाड़ी सड़क पर नजर नहीं आएगी। पहली बार 50 करोड़ रुपये बचत में 30 करोड़ रुपये केवल गाड़ियों से हुई।
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