ऐसे में डायरेक्ट आईपीएस से कहीं ज्यादा काबिलियत प्रमोटी अफसर में होती है। एसोसिएशन ने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश के दो चर्चित मामलों गुड़िया व होशियार सिंह कांड की जांच की जिम्मेदारी आईजी रैंक के डायरेक्ट आईपीएस अधिकारियों के जिम्मे था।
दोनों ही मामलों में सिर्फ पुलिस की छवि खराब हुई है। हाल में बद्दी में डायरेक्ट आईपीएस के एसपी होने के बावजूद न सिर्फ अव्यवस्था हुई, बल्कि सीएम को एसपी का तबादला तक करना पड़ गया।
प्रदेश कैडर मिलने के बाद 2016 बैच के तीन प्रशिक्षु आईपीएस अफसर आकृति शर्मा, वत्सला और अभिषेक यादव जिला प्रैक्टीकल प्रशिक्षण द्वितीय चरण के लिए हिमाचल पहुंचे।
करीब साल भर एसपी ऑफिस से लेकर पुलिस थाने तक तैनात रहकर पुलिसिंग सीखने के लिए सरकार ने आकृति शर्मा को जनवरी में शिमला, वत्सला गुप्ता को मंडी और अभिषेक यादव को कुल्लू में तैनाती दी। इसी बीच शिमला और मंडी एसपी का तबादला हो गया।
वहां प्रदेश पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर आईपीएस बने अफसर तैनात हो गए। दोनों की तैनाती के कुछ दिन बाद ही सरकार ने आकृति और वत्सला का तबादला शिमला से हमीरपुर और मंडी से बिलासपुर कर दिया। कुल्लू में अभी भी डायरेक्ट आईपीएस एसपी हैं, इसलिए वहां तैनात अभिषेक का तबादला नहीं किया गया।