हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से आईएसआईएस एजेंट की गिरफ्तारी के बाद ऐसा लगा रहा है कि प्रदेश दहशतगर्दों की पसंदीदा पनाहगाह बन रहा है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी आतंकी संगठन के सक्रिय सदस्य को यहां से पकड़ा गया है।
इससे पहले आईएसआई एजेंट भी यहां से पकड़े गए। ज्यादातर मामलों में पकड़े गए शख्स लंबे समय से हिमाचल में रह रहे थे लेकिन न तो खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक लगी और न ही पुलिस को। सूत्रों की मानें तो पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंक पर अंकुश के बाद हिमाचल दहशतगर्दों के लिए मुफीद जगह बन गया है।
यहां आकर वे अपने स्लीपर सेल और एजेंट तैयार करते हैं। ये उन्हें सूचना मुहैया कराने के साथ पनाह भी देते हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे हिमाचल पुलिस की पिछड़ी तकनीक और सरकार की उदासीनता को वजह मानते हैं।
नाम न लिखने की शर्त पर एक पुलिस अफसर ने कहा कि आज भी हिमाचल पुलिस और सीआईडी के पास वह तकनीक नहीं है, जो देश के बाकी प्रदेशों की पुलिस के पास है। तकनीकी कमी के चलते कई बार छोटे अपराध को पकड़ने में काफी दिन लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में कोई आतंकी वारदात नहीं होती।
अफसरों का अपना नेटवर्क
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि तकनीकी रूप से पिछड़ने के बावजूद हिमाचल में अफसरों का अपना नेटवर्क उनके काम आता है। कुछ अफसर अपने बैच के दूसरे प्रदेशों या केंद्रीय एजेंसियों में तैनात अधिकारियों से तालमेल बना सूचनाएं जुटाते हैं। इसके आधार पर पुलिस ने भी कुछ एजेंटों को पकड़ा है। हालांकि, इसमें केंद्रीय एजेंसियों का रोल ज्यादा रहा है। उनसे मिली सूचना के आधार पर ही स्थानीय पुलिस कार्रवाई कर पाती है।