पहली गिरफ्तारी के बाद कांगड़ा कोर्ट में पेश किए आरोपी(फाइल)
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हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में प्रदेश के पुलिस अफसर सीबीआई के रडार पर आ सकते हैं। सीबीआई इस मामले से जुड़े अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुला सकती है। हालांकि, यह कहना अभी मुश्किल है कि पुलिस अधिकारियों या कर्मचारियोें की इसमें कोई मिलीभगत रही है या नहीं, यह तो जांच में ही सामने आएगा। निष्पक्ष छानबीन की मांग उठने पर ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 17 मई को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का एलान किया था। अब बेशक यह जांच छह महीने के बाद सीबीआई को दी गई हो, पर इसके कई मायने होंगे। इस परीक्षा को करवाने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था।
यह कमेटी आईजी की अध्यक्षता में गठित की गई थी। राज्य सरकार ने परीक्षा करवाने का जिम्मा कमेटी को सौंपा था। हालांकि, पुलिस की एसआईटी की तफ्तीश में किसी अधिकारी की मिलीभगत सामने नहीं आई है, मगर सीबीआई तह तक जाएगी। ऐसे में मामले से जुडे़ कई अधिकारियों को पूछताछ में बुलाया जा सकता है। आ गए हैं। इससे पहले सुर्खियों में रहे गुड़िया कांड में भी हिरासत में मौत मामलेे में पुलिस के अधिकारी सीबीआई की जांच के बाद जेल गए हैं। अब फिर जांच की आंच उन तक पहुंच सकती है।
जांच के लिए 6 मई को गठित की थी एसआईटी
राज्य सरकार ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले की जांच के लिए 6 मई को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हुआ। डीआईजी मधुसूदन को एसआईटी की कमान सौंपी गई थी। इसके बाद एसआईटी ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। हालांकि इसमें कुछ खास सामने नहीं आया था।