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HP Horticulture News: सेब की अच्छी फसल के लिए इस साल भी चिलिंग ऑवर की चुनौती

Sat, 25 Jan 2025 01:36 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

 जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी के ट्रेंड में आए बदलाव से समय पर पर्याप्त बर्फबारी न होना बागवानों के लिए चिंता का सबब बन रहा है। 
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सेब के पेड़। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेब की अच्छी फसल के लिए इस साल भी चिलिंग ऑवर चुनौती साबित हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फबारी के ट्रेंड में आए बदलाव से समय पर पर्याप्त बर्फबारी न होना बागवानों के लिए चिंता का सबब बन रहा है। बागवानों का मानना है कि चिलिंग ऑवर पूरे न होने से पिछले तीन साल से सेब के उत्पादन में गिरावट आ रही है। इस साल भी सर्दियों से पहले करीब तीन माह सूखे की मार रही और अब जरूरत के मुताबिक बारिश-बर्फबारी नहीं हो रही। हिमाचल के 7000 फीट से नीचे के सेब उत्पादक क्षेत्रों में अब तक औसतन 500 से 700 घंटे चिलिंग ऑवर पूरे हुए हैं। 7000 फीट से ऊपर के क्षेत्रों में 800 से 900 घंटे तक चिलिंग ऑवर पूरे हो चुके हैं। जिन क्षेत्रों में सीधी धूप पड़ती है, उनके मुकाबले छाया वाले क्षेत्रों में चिलिंग ऑवर पूरे होने की रफ्तार बेहतर है।

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हालांकि कुछ क्षेत्रों में जहां एकाएक तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, चिलिंग ऑवर घटने भी शुरू हो गए हैं। कुछ प्रगतिशील बागवानों ने अपने बगीचों में वेदर स्टेशन लगा रखे हैं जिनमें चिलिंग ऑवर का विवरण दर्ज हो रहा है। 5000 फीट की ऊंचाई वाले कुछ बगीचों में सेब के पेड़ों में बीमे बनने शुरू हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बर्फबारी होने से ठंड बढ़ने और तेज धूप खिलने से तापमान बढ़ने से सेब के पौधों में असमय बीमे आ रहे हैं। ऐसे में फ्लावरिंग तो अच्छी होगी लेकिन बीमे कमजोर होने से फलों की सेटिंग होने पर संशय है। फरवरी माह में अच्छी बारिश की जरूरत रहेगी, ताकि जमीन में नमी होने से अच्छी फसल के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकें।

क्या होते हैं चिलिंग ऑवर
सेब की अच्छी फसल के लिए बगीचों में प्रसुप्त अवस्था के दौरान न्यूनतम तापमान 7 डिग्री से कम रहना चाहिए। सेब की किस्मों के अनुसार 700 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर की जरूरत रहती है। बर्फ गिरने पर पौधों की यह जरूरत कम समय में पूरी हो जाती है, लेकिन बिना बर्फ गिरे भी तापमान 7 डिग्री से कम चल रहा हो तो भी चिलिंग ऑवर पूरे हो जाते हैं। सेब की स्पर किस्मों के लिए 600 से 700 घंटे, जबकि पुरानी रॉयल डिलीशियस किस्मों के लिए 1200 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर होने चाहिए।

पिछे वर्षों में हिमाचल में सेब उत्पादन
वर्ष सेब उत्पादन
2022-23 - 6,72,343
2023-24 - 5,06,687
2024-25 - 4,18,774
(सेब उत्पादन मीट्रिक टन में)
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चिलिंग ऑवर पूरे न होने से पिछले दो साल से फसल प्रभावित हो रही है। नमी न होने से इस साल भी फसल प्रभावित होने का अंदेशा है। फरवरी में अच्छी बारिश की जरूरत रहेगी, फ्लावरिंग के समय मौसम साफ रहेगा तभी अच्छी फसल की उम्मीद की जा सकती है।- लोकेंद्र सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन, हिमाचल

चिलिंग ऑवर पूरे होने के लिए अभी समय बाकी : डाॅ. दिनेश
अन्य फसलों की तरह सेब पर भी जलवायु परिवर्तन का असर पड़ रहा है। बर्फबारी का समय भी बदल गया है। कुछ इलाकों में चिलिंग ऑवर सही चल रहे हैं, अभी चिलिंग ऑवर पूरे होने के लिए समय बाकी है। सेब की नई किस्मों के लिए बहुत अधिक चिलिंग ऑवर की जरूरत नहीं रहती।- डाॅ. दिनेश ठाकुर, सहायक निदेशक, क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा
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