हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सीबीएसई स्कूलों के लिए टीचर टेस्ट पॉलिसी मामले में बुधवार को बहस पूरी हो गई है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपने फैसले को सुरक्षित रख दिया है।
सरकार का मानना है कि सरकारी स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में बदलने के लिए जो पॉलिसी लाई गई है, वह भविष्य को देखते हुए बनाई गई है। इसका मकसद शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना है। प्रदेश सरकार बच्चों को बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देना चाहती है। दूसरी ओर एसोसिएशन इस टीचर टेस्ट का विरोध कर रही है। उसका मानना है कि सरकार एक वर्ग के बीच एक अन्य वर्ग पैदा कर रही है, जो संविधान के खिलाफ है। अदालत को बताया गया कि वह स्कूलों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार जिस तरीके से अध्यापकों का चयन कर रही है। वह सरासर गलत, अवैध और अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने अदालत को बताया कि इस पॉलिसी के मुताबिक शिक्षकों के बीच समानता और असमानता, कम और ज्यादा अनुभव की खाई पैदा हो रही है, जो शिक्षकों के बीच हीनता की भावना पैदा कर रही है। भविष्य में अध्यापकों की नियुक्ति और ट्रांसफर के मापदंडों भी स्पष्ट स्थिति नहीं है।