यह कार्रवाई शिमला, रामपुर, कुल्लू और मंडी में अमल में लाई गई। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान सबसे ज्यादा वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले रोहड़ू तहसील के गांव अर्हल में भागू राम से 73 बीघा 13 बिस्वा छुड़ाई गई।
वन विभाग पूरे प्रदेश में हटाए गए या हटाए जा रहे वन भूमि से अवैध कब्जों का ब्योरा देने में नाकाम रहा। हालांकि वन विभाग ने बताया कि हटाये गए कब्जों की जानकारी वेब पोर्टल पर डाली जा रही है। अब मामले में अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि वन विभाग के संबंधित अधिकारी कोर्ट में झूठे आंकड़े पेश कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। कोर्ट ने वन विभाग के अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा था कि जब अदालत ने 5 बीघा से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले
कब्जाधारियों के कब्जे तुरंत हटाने के आदेश दिए थे तो उन्होंने अदालत के आदेशों की अनुपालना क्यों नहीं की। कोर्ट ने वन विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिए कि वह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को बताए।